झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के गुरसरांय क्षेत्र में साधन सहकारी समिति नारायणपुरा पर खाद वितरण की अव्यवस्था ने एक बुजुर्ग किसान की जान पर बनाई ली। सुबह 6 बजे से लाइन में खड़े रमेश अडजरा नामक किसान को चार बोरी के बजाय केवल दो बोरी खाद मिली, जिससे नाराजगी के बीच वह गश खाकर गिर पड़े। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। किसान नेता ने सहकारी समिति पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि खाद की कमी और अनियमित वितरण से किसान परेशान हैं।
किसान नेता सुरेंद्र सिंह ने बताया कि बुजुर्ग किसान रमेश अडजरा (निवासी: अडजरा) सुबह करीब 6 बजे से गुरसरांय नारायणपुरा साधन सहकारी समिति पर खाद लेने के लिए लाइन में लगे थे। समिति के बाहर लगी सूची में स्पष्ट रूप से लिखा था कि केसीसी कार्ड धारकों को चार बोरी खाद दी जाएगी, जबकि अन्य को दो बोरी। लेकिन रमेश को केवल दो बोरी ही दी गईं। जब उन्होंने आपत्ति जताई और कहा कि वह बीमार हैं और दोबारा नहीं आ पाएंगे, तो उनकी बात की अनदेखी की गई। इसके तुरंत बाद वह गश खाकर जमीन पर गिर पड़े, और उनकी हालत बिगड़ गई।
स्थानीय लोगों ने तुरंत रमेश को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां प्रारंभिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि लंबे इंतजार, तपती धूप और तनाव के कारण उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
सहकारी समिति पर आरोप: सूची के विपरीत वितरण
मौके पर मौजूद अन्य किसानों से बातचीत में सामने आया कि समिति में खाद वितरण में पूरी मनमानी हो रही है। सूची के अनुसार केसीसी कार्ड वालों को चार बोरी मिलनी चाहिए, लेकिन किसी को एक बोरी तो किसी को दो बोरी ही दी जा रही है। किसानों ने कहा कि वे घर के कामकाज छोड़कर सुबह से तपती धूप में लाइन में लगे रहते हैं, फिर भी वादे के मुताबिक खाद नहीं मिल पा रही। एक किसान ने बताया, “हमें बताया गया था कि चार बोरी मिलेंगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। यह खाद की किल्लत और कालाबाजारी का नतीजा लगता है।”
यह घटना उत्तर प्रदेश में खाद वितरण की लंबे समय से चली आ रही समस्या को उजागर करती है। हाल ही में झांसी के ही टोड़ी फतेहपुर क्षेत्र की साधन सहकारी समिति दुगारा में भी यूरिया खाद के लिए लाइन में खड़ी दो महिलाओं के बेहोश होने के बाद किसानों ने मऊरानीपुर-गुरसराय सड़क पर जाम लगा दिया था। वहां भी किसानों ने समिति सचिव पर चहेतों को प्राथमिकता देने और टोकन सिस्टम में लापरवाही का आरोप लगाया था। इसी तरह, गोंडा और एटा जिलों में भी खाद की कमी से किसान बेहोश होने की घटनाएं सामने आई हैं, जहां महिलाएं और बुजुर्ग किसान लंबे इंतजार में गिर पड़े।
किसानों की परेशानी और मांग
किसान नेता सुरेंद्र सिंह ने कहा, “यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में खाद वितरण की खराब व्यवस्था का उदाहरण है। किसान खरीफ फसल के लिए खाद का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन समितियां वादे पूरा नहीं कर रही।” उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सहकारी समिति के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, और खाद का पारदर्शी वितरण सुनिश्चित किया जाए। स्थानीय एसडीएम और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन किसानों में आक्रोश बरकरार है।
- रिपोर्ट नेहा श्रीवास





