झांसी: झांसी के रक्सा थाना क्षेत्र के पुनावली कला गांव में घरेलू कलह ने एक पूरे परिवार को तबाह कर दिया। बुधवार रात पति-पत्नी के बीच शराब और घरेलू विवाद के बाद पत्नी वंदना अहिरवार (35) ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। सदमे में पति मनोज अहिरवार (38) ने भी महज 24 घंटे के भीतर खुदकुशी कर ली। शुक्रवार सुबह मेडिकल कॉलेज के पीछे ग्रीन होम सिटी के पास झाड़ियों में एक पेड़ से उनका शव तौलिया के सहारे लटका मिला। इस दोहरी त्रासदी से तीन मासूम बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है – अब उनके सिर से मां-बाप दोनों का साया उठ गया।
परिजनों ने पुलिस को बताया कि मनोज अहिरवार मजदूरी करता था और शराब का आदी था। अक्सर शराब पीकर घर लौटता, जिससे दंपती में रोजाना विवाद होता था। 2009 में हुई शादी के बाद से यह सिलसिला चल रहा था। बुधवार रात भी मनोज शराब पीकर घर आया। विवाद किसी बात पर बढ़ गया (कुछ रिपोर्ट्स में घर का सामान न लाने या मोबाइल ऐप डिलीट करने का जिक्र)। नाराज वंदना ने साड़ी से फंदा लगाकर जान दे दी। बच्चों ने दीवार तोड़कर मां को बचाने की कोशिश की, लेकिन देर हो चुकी थी।
मनोज घर लौटा तो पत्नी की लाश देखकर बिलख-बिलखकर रोने लगा। शव से लिपटकर खुदकुशी की बात करने लगा। पुलिस और परिजनों ने उसे समझा-बुझाकर शांत किया। वंदना के शव को पोस्टमार्टम के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां मनोज भी गया। पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर लौटे, लेकिन मनोज लापता हो गया। वंदना का अंतिम संस्कार बेटे देव (14) ने किया। परिजन तलाश करते रहे।
शुक्रवार सुबह ग्रीन होम सिटी पास झाड़ियों में पेड़ से लटका शव मिलने पर आसपास के लोगों ने सूचना दी। पुलिस पहुंची, शव बरामद किया। जेब से आधार कार्ड मिलने पर पहचान मनोज अहिरवार की हुई। नवाबाद थाना प्रभारी रवि श्रीवास्तव ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया।
दंपती के तीन बच्चे – देव (14), राधिका (9) और ऋषभ (7) – अब अनाथ हो गए। दादा उन्हें अपने साथ ले गए। पूरा गांव सदमे में है। परिजनों का कहना है कि शराब की लत और रोजाना के झगड़े ने परिवार को बर्बाद कर दिया।
घरेलू हिंसा और शराब का बढ़ता खतरा
यह घटना उत्तर प्रदेश में घरेलू कलह और शराब से जुड़ी आत्महत्याओं के बढ़ते ट्रेंड को उजागर करती है। झांसी में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शराब की लत परिवारों में तनाव बढ़ाती है, और छोटे-छोटे विवाद बड़े हादसे का रूप ले लेते हैं। बच्चों पर इसका गहरा असर पड़ता है।
- रिपोर्ट – नेहा श्रीवास





