आगरा: जनपद आगरा के ब्लाक पिनाहट ब्लॉक के गांव अतैयापुरा में पांच वर्षीय बालक छोटू (पुत्र कुंवर सिंह) की रेबीज से मौत ने स्वास्थ्य विभाग और रेबीज टीकाकरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना 3 फरवरी 2026 को सामने आई है और विभिन्न न्यूज़ पोर्टलों जैसे भास्कर, अमर उजाला, ईटीवी भारत आदि में प्रमुखता से कवर की गई है।

घटना का क्रम

  • 9 जनवरी 2026: बच्चा घर के बाहर खेलते समय आवारा कुत्ते के हमले का शिकार हुआ। कुत्ते ने चेहरे और सिर पर काट लिया (यह Category III bite माना जाता है, जो सबसे गंभीर होता है)।
  • परिजनों ने तुरंत पिनाहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) की पहली डोज दी गई।
  • 9, 12 और 16 जनवरी को तीन डोज लगाई गईं। अगली डोज 7 फरवरी को निर्धारित थी।
  • 1 फरवरी (शनिवार): अचानक बच्चे की तबीयत बिगड़ी (रेबीज के लक्षण जैसे बुखार, भय, पानी से डर आदि दिखे)।
  • परिजन उसे दिल्ली ले गए, लेकिन उपचार के दौरान सुधार नहीं हुआ।
  • 2 फरवरी (रविवार सुबह): बच्चे की मौत हो गई।

स्वास्थ्य विभाग का पक्ष

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी प्रमोद कुशवाहा ने कहा कि बच्चे को नियमानुसार ARV इंजेक्शन लगाए गए थे। मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई है और जांच चल रही है।

सबसे बड़े सवाल: टीका लगने के बावजूद मौत क्यों?

रेबीज वैक्सीन (Post-Exposure Prophylaxis – PEP) सही तरीके से दी जाए तो 99% से अधिक मामलों में प्रभावी होती है, लेकिन दुर्लभ मामलों में फेलियर हो सकता है। भारत में ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में। संभावित कारण (मेडिकल रिपोर्ट्स और WHO गाइडलाइंस के आधार पर):

  1. Rabies Immunoglobulin (RIG) की कमी: Category III bites (सिर/चेहरा/गर्दन पर गहरा काटना) में ARV के साथ तुरंत RIG (पैसिव इम्यूनिटी के लिए) इंजेक्ट करना जरूरी होता है, खासकर घाव के आसपास। अगर RIG नहीं दिया गया या सही जगह नहीं लगाया गया, तो वायरस नर्व्स तक पहुंच सकता है। कई रिपोर्ट्स में यही मुख्य कारण पाया गया है।
  2. घाव की गंभीरता और स्थान: सिर/चेहरा पर काटने से वायरस ब्रेन तक बहुत तेजी से (कभी-कभी घंटों में) पहुंच जाता है। वैक्सीन को एंटीबॉडी बनाने में 7-14 दिन लगते हैं, जबकि RIG तुरंत काम करता है।
  3. वैक्सीन की गुणवत्ता/कोल्ड चेन ब्रेक: वैक्सीन को 2-8°C पर रखना जरूरी है। अगर कोल्ड चेन टूटा हो (ग्रामीण केंद्रों में आम समस्या), तो वैक्सीन कमजोर हो सकती है।
  4. घाव की सफाई में चूक: काटने के तुरंत बाद 15 मिनट तक साबुन और पानी से अच्छी सफाई 99% खतरा कम कर देती है। अगर यह नहीं हुई, तो जोखिम बढ़ता है।
  5. अन्य दुर्लभ कारण: इम्यून सिस्टम की कमजोरी, अधूरी डोज, या बहुत देरी से शुरूआत।

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