लखनऊ।  उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे की वजह से हो रही मौतों पर अब और सख्ती बरती जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसी मौतों को गंभीर अपराध मानते हुए हत्या की श्रेणी में दर्ज किया जाएगा। प्रतिबंध के बावजूद इसकी अवैध बिक्री और उपयोग जारी है, जिससे कई निर्दोष लोगों की जान जा रही है। CM ने पुलिस को राज्यव्यापी छापेमारी का आदेश दिया है, ताकि बिक्री, भंडारण और सप्लाई करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो सके।

चाइनीज मांझे का खतरा क्यों?

चाइनीज मांझा एक प्रकार की कांच की लेप वाली धागा है, जो पतंगबाजी में इस्तेमाल होती है। यह इतनी तेज और मजबूत होती है कि बाइक सवारों, पैदल यात्रियों और यहां तक कि पक्षियों के लिए घातक साबित हो रही है। पिछले छह महीनों में उत्तर प्रदेश में कम से कम सात गंभीर हादसे दर्ज हुए हैं, जिनमें कई मौतें शामिल हैं। ये मांझा गले या शरीर के अन्य हिस्सों को काट देता है, जिससे गंभीर चोटें लगती हैं।

हाल की दुखद घटनाएं

🔹लखनऊ (4 फरवरी 2025): 33 वर्षीय मोहम्मद शोएब की गला कटने से मौत हो गई। वे बाइक पर जा रहे थे तभी मांझे की चपेट में आ गए।
🔹लखनऊ (11 दिसंबर 2025): एक बाइक सवार को गले में गहरी चोट लगी, लेकिन सात टांके लगाकर उनकी जान बचाई गई।
🔹जौनपुर (10 दिसंबर 2025): सहायक प्रोफेसर संदीप तिवारी की मांझे से गला कटने से मौत।
🔹शाहजहांपुर (23 अक्टूबर 2025): 26 वर्षीय रवि शर्मा की घातक चोट से मौत।
🔹अलीगढ़ (30 सितंबर 2025): 28 वर्षीय सलमान की मौत।
🔹गोरखपुर (29 जुलाई 2025): अमित गुप्ता को चार धमनियां कट गईं, लेकिन सर्जरी से बच गए।
🔹शाहजहांपुर (11 जनवरी 2025): कांस्टेबल शहरुख हसन की चोट से इलाज के दौरान मौत।

ये घटनाएं दर्शाती हैं कि प्रतिबंध के बावजूद मांझा बाजार में उपलब्ध है, जो प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है।

CM योगी के निर्देश: क्या होगा अब?

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों से सवाल किया कि प्रतिबंध के बाद भी बिक्री क्यों जारी है। उन्होंने कहा, “चाइनीज मांझे से होने वाली मौतों को हत्या माना जाएगा और जरूरत पड़ने पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाएगा।” पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि:

राज्य भर में छापेमारी की जाए।
अवैध बिक्री और उपयोग करने वालों पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) जैसे सख्त कानून लागू किए जाएं।
उच्च स्तरीय समीक्षा की जाएगी ताकि कार्रवाई की प्रभावशीलता सुनिश्चित हो।

प्रभाव और सुझाव
यह फैसला न केवल मानव जीवन की रक्षा करेगा बल्कि पक्षियों और जानवरों को भी बचाएगा, क्योंकि मांझा से हजारों पक्षी हर साल मरते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आम नागरिकों को भी जागरूक रहना चाहिए और सुरक्षित विकल्प जैसे सूती मांझा का उपयोग करें। सरकार की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकती है, जहां ऐसी घटनाएं आम हैं।

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