•सपा नेता राकेश बघेल से हुई तीखी नोकझोंक,
•सोशल मीडिया पर किसान सम्मान और वर्दी की जवाबदेही को लेकर उठे सवाल
खंदौली(संवाददाता)। जनपद आगरा के खंदौली टोल प्लाजा पर आलू के दाम को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के दौरान एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर का कथित बयान अब विवाद का कारण बन गया है। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार पुलिस अधिकारी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “अगर किसान होते तो फॉर्च्यूनर में नहीं चलते।” इस बयान के सामने आने के बाद इलाके में चर्चा और बहस का माहौल बन गया है।
मौके पर मौजूद समाजवादी पार्टी के नेता राकेश बघेल और पुलिस के बीच इस मुद्दे को लेकर तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। बहस के दौरान बघेल ने पुलिस अधिकारी को चुनौती देते हुए कहा कि किसान की पहचान उसकी गाड़ी से नहीं, बल्कि उसके खेत और मेहनत से होती है।
इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कई लोगों का कहना है कि मेहनत से समृद्ध हुआ किसान यदि अच्छी गाड़ी खरीदता है तो उसे शक की नजर से क्यों देखा जाए। वहीं कुछ लोगों ने वर्दीधारी अधिकारियों से जुड़े पूर्व में सामने आए भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के मामलों का भी जिक्र करते हुए सवाल उठाए हैं।
फिलहाल खंदौली टोल पर हुए इस बयान को लेकर प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह मामला अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि किसान सम्मान और सामाजिक सोच से जुड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

“किसान फॉर्च्यूनर में चले तो सवाल, लेकिन भ्रष्ट लोग करोड़ों में खेलें तो कोई जवाब नहीं! किसान की औकात उसकी गाड़ी नहीं, उसका पसीना तय करता है। मेहनत से कमाई है, किसी से छीनी नहीं। किसानों का अपमान अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगा – राजवीर लवानियां, जिलाध्यक्ष भा. कि. यूनियन

“फॉर्च्यूनर देखकर किसान पर सवाल उठाना शर्मनाक है। किसान खेत में पसीना बहाकर कमाता है, भीख मांगकर नहीं। याद रखिए—किसान कमजोर नहीं, देश की ताकत है। किसान के सम्मान पर उंगली उठी तो जवाब भी उसी भाषा में मिलेगा।”- रामनिवास रघुवंशी, जिला प्रवक्ता भा. कि. यू. (अराजनैतिक)























