वाराणसी: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर बाल यौन शोषण के आरोपों में दर्ज FIR से UP की सियासत गरम है। मंगलवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय भारी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ श्री विद्यामठ पहुंचे और शंकराचार्य से मुलाकात कर उनका खुला समर्थन जताया। कांग्रेस ने इसे “राजनीतिक साजिश” करार देते हुए बुधवार (25 फरवरी 2026) को पूरे प्रदेश में बड़े शांतिपूर्ण प्रदर्शन और विरोध का ऐलान किया है।
अजय राय ने शंकराचार्य का आशीर्वाद लेने के बाद मीडिया से कहा, “धर्म जब सत्य के साथ खड़ा होता है, तो विजय निश्चित होती है। शंकराचार्य जी के खिलाफ FIR निराधार है और यह करोड़ों सनातनी हिंदुओं की भावनाओं पर प्रहार है। सरकार संतों पर दबाव बनाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।” उन्होंने घोषणा की कि बुधवार को UP के सभी 75 जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे, शांतिपूर्ण विरोध करेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों को सौंपेंगे। मुख्य मांग: मामले की जांच किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी (जैसे CBI) से कराई जाए।
विवाद की जड़ क्या है?
प्रयागराज की विशेष POCSO अदालत (एडीजे विनोद कुमार चौरसिया) के आदेश पर झूंसी थाने में FIR दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की ओर से दाखिल याचिका पर कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि बाल यौन शोषण (POCSO एक्ट की धाराएं 3,5,6,9,17 आदि और BNS की संबंधित धाराएं) के आरोपों की जांच हो। आरोप: शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने गुरुकुल और धार्मिक सभाओं (जैसे माघ मेला) में नाबालिगों (एक 14 वर्षीय और एक 17 वर्षीय) का बार-बार यौन शोषण किया। FIR में 2-3 अज्ञात लोगों को भी शामिल किया गया है।
शंकराचार्य ने आरोपों को “झूठा और साजिश” बताया है। उन्होंने कहा कि वे जांच का सामना करेंगे और भागेंगे नहीं। हाल ही में उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। कुछ रिपोर्ट्स में नया मोड़ आया है – शाहजहांपुर के एक व्यक्ति ने दावा किया कि उन्हें शंकराचार्य पर झूठा आरोप लगाने के लिए लालच और धमकी दी गई। पुलिस जांच तेज कर रही है, जिसमें पीड़ितों के बयान और मेडिकल जांच शामिल हैं।

