फतेहपुर सीकरी/आगरा: यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल फतेहपुर सीकरी में आवारा गोवंश का आतंक अब पर्यटकों की जान पर बन आया है। बीते दिनों पर्यटकों के लिए बनी गुलदस्ता पार्किंग (या गुलिस्तां पार्किंग) में दो उग्र सांड आपस में भिड़ गए। लड़ाई इतनी भीषण थी कि गोल्फ कार्ट के पास लगी बैरिकेडिंग टूट गई, कैंटीन की कुर्सियां तितर-बितर हो गईं। घटना के दौरान टूरिस्ट गाइड और पर्यटकों में अफरा-तफरी मच गई – गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और सभी बाल-बाल बच गए।
यह घटना सोशल मीडिया और लोकल न्यूज़ में वायरल हो गई है, जहां वीडियो और फोटो में साफ दिख रहा है कि सांड कैसे एक-दूसरे पर टूट पड़े और आसपास की चीजें उखाड़ फेंकी। पर्यटक बाल-बाल बचे, लेकिन इस घटना ने फतेहपुर सीकरी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का विवरण
घटना विगत दिनों की है, जब पर्यटक गाड़ियां पार्क कर रहे थे। अचानक दो सांडों में झगड़ा शुरू हुआ। वे एक-दूसरे पर सींग मारते हुए भिड़ गए, जिससे धूल उड़ गई और लोग इधर-उधर भागने लगे। एक वीडियो में दिख रहा है कि सांड पार्किंग एरिया में घुसकर बैरिकेड तोड़ते हुए आगे बढ़े।
फतेहपुर सीकरी हर रोज हजारों घरेलू और विदेशी पर्यटकों से भरा रहता है। यहां मुगल सम्राट अकबर द्वारा बनाई गई इमारतें दुनिया भर में मशहूर हैं, लेकिन सड़कों और पार्किंग में आवारा सांडों के झुंड खड़े रहते हैं।
आवारा गोवंश की बड़ी समस्या
- पर्यटन क्षेत्रों में खतरा: मुख्य बाजार, सब्जी मंडी, बाईपास, किराना से तेरहमोरी तक और अनाज मंडी के आसपास गोवंश के झुंड रोज दिखते हैं। इनकी आपसी लड़ाइयों में कई बार राहगीर और दुकानदार घायल हो चुके हैं।
- किसानों की मुश्किलें: खेतों में घुसकर फसलें बर्बाद कर देते हैं। किसान रात-भर पहरा देने को मजबूर हैं।
- सड़क हादसे: ग्रामीण और शहरी इलाकों में रोज दुर्घटनाएं हो रही हैं। हाईवे पर भी गोवंश घूमते हैं, जिससे वाहन चालकों को खतरा रहता है।
- गौशालाओं की हकीकत: प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों और नगर पालिकाओं को गौशाला बनाने के लिए करोड़ों रुपये दिए। कई नई गौशालाएं बनीं, लेकिन सड़कों पर गोवंश का विचरण थमा नहीं। ब्लॉक स्तर पर पकड़ने के वाहन हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाती है – दो-चार पशु पकड़कर गौशाला भेज दिया जाता है।
पर्यटन और स्थानीय व्यापार पर असर
यह घटना पर्यटन पर बुरा असर डाल रही है। विदेशी पर्यटक जो मुगल इतिहास देखने आते हैं, उन्हें आवारा मवेशियों से डर लगता है। स्थानीय लोग कहते हैं – “अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ तो पर्यटन और व्यापार दोनों प्रभावित होंगे।”
मांगें:
- नियमित पकड़ अभियान और निगरानी।
- बाजार व पर्यटन क्षेत्रों में नो-कैटल ज़ोन घोषित करना।
- गौशालाओं की क्षमता बढ़ाना और प्रबंधन सुधारना।
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना।





