प्रयागराज। धार्मिक जगत में बड़ा विवाद छिड़ गया है। ज्योतिर्मठ (ज्योतिष पीठ) के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद प्रकाश उपाध्याय पर नाबालिग बटुकों के यौन शोषण के गंभीर आरोप लगे हैं। झूंसी थाने में POCSO एक्ट (POCSO Act) की धाराओं के साथ BNSS की संबंधित धाराओं में FIR दर्ज है। यह मामला POCSO स्पेशल कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ, जहां शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी (शाकुंभरी पीठाधीश्वर और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य) ने दो नाबालिग बटुकों (उम्र 14 और 17 वर्ष) को पेश कर आरोप लगाए थे। कोर्ट में बच्चों के बयान कैमरे पर दर्ज हुए थे।
मुख्य आरोप क्या हैं?
- गुरु दीक्षा और धार्मिक मार्गदर्शन के नाम पर नाबालिग बटुकों से जबरन यौन कृत्य।
- राजस्थान, बिहार जैसे राज्यों से लाए गए बच्चों को मठ (विद्या मठ) और महाकुंभ/माघ मेले के शिविरों में ‘सफेदपोश’ या रसूखदार लोगों के सामने पेश कर उत्पीड़न।
- विरोध करने पर डराना-धमकाना और चुप रहने के लिए मजबूर करना।
- करीब 20 अन्य बटुक भी इसी तरह प्रभावित, लेकिन डर के कारण सामने नहीं आ रहे।
- पीड़ित बटुक माघ मेले के दौरान मौका पाकर भागे और आशुतोष ब्रह्मचारी की शरण में पहुंचे।
मेडिकल रिपोर्ट का खुलासा:
पुलिस ने बुधवार को पीड़ित नाबालिगों का सरकारी अस्पताल में दो डॉक्टरों के पैनल से मेडिकल परीक्षण कराया। रिपोर्ट बंद लिफाफे में जांच अधिकारी को सौंपी गई, जिसमें जबरन यौन कृत्य और उत्पीड़न की पुष्टि हुई है। पुलिस सूत्रों ने इसे ‘चौंकाने वाला’ बताया। रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाएगी, जो मामले की दिशा तय करेगी।
आशुतोष ब्रह्मचारी का दावा:
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने प्रेस वार्ता में कहा कि उनके पास लैपटॉप में डिजिटल सबूत (फोटो, वीडियो) हैं, जो यौन शोषण साबित करते हैं। उन्होंने आश्रम में साक्ष्य मिटाने और करीब 4 करोड़ रुपये के घोटाले का भी आरोप लगाया। आशुतोष ने स्वामी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की और कहा कि विदेशी/राजनीतिक फंडिंग से जुड़े आरोप भी हैं।
स्वामी का पक्ष:
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को पूरी तरह निराधार और ‘साजिश’ बताया। उन्होंने कहा कि झूठे शपथपत्र दाखिल किए गए हैं और उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की गई है, जहां सुनवाई 27 फरवरी को हो सकती है। स्वामी ने पुलिस और प्रशासन पर ‘फर्जी केस’ थोपने का आरोप लगाया है।
पुलिस और कानूनी स्थिति:
झूंसी थाने में विवेचना जारी। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर सकती है और आवश्यकता पड़ने पर गिरफ्तारी कर सकती है। अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच हो रही है। मामला NHRC तक पहुंच गया है, जहां एक संस्था ने ‘दुरुपयोग’ की शिकायत की है। स्वामी ने काउंटर केस भी दाखिल किया है।
स्थानीय और धार्मिक प्रतिक्रिया:
यह मामला संत समाज और राजनीति में हलचल मचा रहा है। कुछ इसे ‘साजिश’ बता रहे हैं, जबकि पीड़ितों के पक्ष में न्याय की मांग हो रही है। माघ मेले के दौरान शुरू हुआ विवाद अब POCSO कोर्ट और हाईकोर्ट तक पहुंच गया है।





