सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवार जनरल कैटेगरी के कट-ऑफ से अधिक अंक हासिल करते हैं, तो उन्हें जनरल कैटेगरी की सीटों पर चयनित होने से रोका नहीं जा सकता।
🔹 क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि मेरिट के आधार पर चयन संविधान के मूल सिद्धांतों में से एक है। यदि आरक्षित वर्ग का कोई अभ्यर्थी सामान्य वर्ग के तय मानकों को पूरा करता है, तो उसे केवल उसकी सामाजिक श्रेणी के आधार पर जनरल कैटेगरी से बाहर नहीं किया जा सकता।
🔹 आरक्षण व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि:
• आरक्षित वर्ग के योग्य उम्मीदवार डबल नुकसान का शिकार नहीं होंगे
• जनरल कैटेगरी की सीटों पर योग्यता सर्वोपरि होगी
• आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित सीटों पर अतिरिक्त अवसर सुरक्षित रहेंगे
🔹 सरकारी नौकरियों और एडमिशन पर दूरगामी प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले का असर: केंद्र और राज्य सरकार की भर्तियों
मेडिकल, इंजीनियरिंग और विश्वविद्यालयों के एडमिशन
प्रतियोगी परीक्षाओं की चयन प्रक्रिया
पर साफ तौर पर देखने को मिलेगा।
🔹 संवैधानिक संतुलन की मिसाल
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय सामाजिक न्याय और मेरिट के बीच संतुलन स्थापित करता है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि आरक्षण का उद्देश्य अवसर प्रदान करना है, न कि योग्यता को सीमित करना।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाएगा, बल्कि योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों की भी रक्षा करेगा। आने वाले समय में यह निर्णय सरकारी भर्तियों और शिक्षा नीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।





