आगरा: आगरा में शस्त्र लाइसेंसों के फर्जीवाड़े का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर रहा है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की गहन जांच में 100 से अधिक शस्त्र लाइसेंसों में गंभीर अनियमितताएं और छेड़छाड़ का खुलासा हुआ है। आरोपी गिरोह ने शस्त्र लाइसेंस पोर्टल के लॉगिन का दुरुपयोग कर दूसरे जिलों के लाइसेंसों में नाम, पता और यूनिक आईडी बदल दी। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध हथियार खरीदे गए, जिसमें कई वैध लाइसेंस धारक – यहां तक कि सेना के जवान – भी फंस गए।
जांच में सामने आया कि आरोपी पोर्टल एक्सेस का गलत इस्तेमाल कर लाइसेंस धारकों के नाम पर हथियार खरीदते थे। कई सैनिकों को तब पता चला जब उनके नाम पर हथियारों की डिलीवरी या रजिस्ट्रेशन की जानकारी आई। STF ने आयुध (आर्म्स) कार्यालय से 100 से अधिक संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए हैं। इस गिरोह ने आयुध कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से यूनिक आईडी बदलने जैसे गंभीर अपराध किए।
मुख्य आरोपी और चार्जशीट:
मामला थाना नाई की मंडी में पिछले वर्ष (2025) दर्ज मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें अरशद (मोहम्मद अरशद खान), जैद (मोहम्मद जैद खान), राजेश बघेल, भूपेंद्र सारस्वत, संजय कपूर (सेवानिवृत्त आर्म्स क्लर्क) और प्रशांत कुमार (निलंबित कर्मचारी) सहित अन्य नामजद हैं। STF ने संजय कपूर और प्रशांत कुमार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच में अरशद ने फर्जी PAN, आधार और ड्राइविंग लाइसेंस से कई लाइसेंस बनवाए। जैद पर कई पुराने मुकदमे हैं और मुख्तार अंसारी से जुड़े होने के आरोप भी लगे हैं।
जमानत सुनवाई और सुप्रीम कोर्ट का रुख:
अरशद और जैद की जमानत याचिका पर 16 फरवरी 2026 को सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की गिरफ्तारी से राहत को रद्द कर दिया था, जिससे जांच को नई गति मिली। कोर्ट ने समयबद्ध जांच के आदेशों पर भी रोक लगाई है।
जांच का दायरा:
STF अब यह पता लगा रही है कि यह नेटवर्क कितने जिलों तक फैला है। पहले आगरा STF यूनिट जांच कर रही थी, लेकिन बाद में लखनऊ STF को ट्रांसफर कर दिया गया। फोरेंसिक जांच भी चल रही है। यह मामला सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है, क्योंकि फर्जी लाइसेंस से अवैध हथियारों का दुरुपयोग हो सकता है। प्रशासन इसे बेहद गंभीरता से ले रहा है।





