आगरा: आगरा में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य योजनाओं पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। टीकाकरण और प्रसव संबंधी आंकड़ों की समीक्षा में आशा कार्यकर्ताओं द्वारा कमीशन के खेल का खुलासा हुआ है। कई आशा कार्यकर्ताएं गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों की बजाय निजी अस्पतालों और झोलाछाप केंद्रों में पहुंचा रही थीं, बदले में मोटा कमीशन वसूल रही थीं।
सूत्रों के अनुसार, सामान्य प्रसव पर करीब 1000 रुपये और सिजेरियन डिलीवरी पर 5000 रुपये तक कमीशन तय था। यह रकम निजी अस्पताल संचालकों से सीधे दी जाती थी। खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब टीकाकरण और सरकारी प्रसव के आंकड़ों में भारी अंतर मिला। बीते छह महीनों में एक आशा के क्षेत्र में औसतन 10 टीकाकरण दर्ज थे, लेकिन सरकारी केंद्रों पर सिर्फ 1-2 प्रसव ही हुए।
जांच में 199 आशा कार्यकर्ताओं की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। सभी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब संतोषजनक न होने पर उनकी सेवा समाप्त की जाएगी।
एक और चौंकाने वाला तथ्य: अगस्त 2025 से कई आशाओं को समय पर भुगतान नहीं मिला। माना जा रहा है कि आर्थिक दबाव और भुगतान देरी से कुछ आशाएं कमीशन के लालच में पड़ गईं।
स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि जननी सुरक्षा योजना और सरकारी प्रसव सेवाओं की विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं होगा। गहन जांच जारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।





