आगरा। जिले में शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया पिछले करीब दो महीनों से लगभग ठप पड़ी है। आयुध कार्यालय में इस समय 700 से अधिक नवीनीकरण आवेदन लंबित बताए जा रहे हैं, जबकि प्रतिदिन लगभग 50 नए आवेदन ऑनलाइन सिस्टम पर दर्ज हो रहे हैं। बढ़ते दबाव और प्रशासनिक सुस्ती के कारण लाइसेंसधारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

नवीनीकरण में देरी के चलते लाइसेंसधारियों की वैधानिक स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है। कई आवेदक महीनों से आयुध कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब या तय समयसीमा नहीं मिल पा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, गत वर्ष हुई एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई के बाद से आयुध कार्यालय में सतर्कता और दबाव का माहौल बना हुआ है। अवैध असलहा और संदिग्ध शस्त्र लाइसेंस मामलों की जांच के दौरान एसटीएफ ने कई महत्वपूर्ण फाइलों और रिकॉर्ड की जानकारी मांगी थी। इसके बाद से नवीनीकरण प्रक्रिया की रफ्तार अचानक काफी धीमी हो गई।

बताया जा रहा है कि कुछ कर्मचारियों पर मुकदमे दर्ज होने के बाद स्टाफ में भय और असमंजस की स्थिति है। कार्रवाई के डर से अधिकारी और कर्मचारी फाइलों को आगे बढ़ाने में हिचकिचा रहे हैं, जिससे लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

इस बीच आयुध कार्यालय से कुछ फाइलें और महत्वपूर्ण रिकॉर्ड गायब होने की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं। सूत्रों का दावा है कि एसटीएफ ने जैद की पत्नी, एक बिल्डर, एक शिक्षाविद और धर्मांतरण के आरोपी से जुड़े शस्त्र लाइसेंस प्रकरणों की फाइलें तलब की थीं, लेकिन कई रिमाइंडर के बावजूद पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है।

प्रशासनिक स्तर पर बनी यह स्थिति कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। जानकारों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो लंबित आवेदनों का बोझ और बढ़ेगा तथा इसका असर कानून व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

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