लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में अब प्रतीकों की जंग चरम पर है! समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार (13 फरवरी 2026) को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक तीखा पोस्ट करके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्र-राज्य संबंधों पर निशाना साधा। अखिलेश ने बिना नाम लिए बीजेपी के भीतर कथित गुटबाजी और ‘बुलडोजर’ से ‘ब्रह्मोस’ तक की छवि पर सवाल उठाए।
अखिलेश यादव का पोस्ट क्या था?
अखिलेश ने एक्स पर लिखा: “अब क्या बुलडोज़र की जगह ब्रह्मोस भेजेंगे? दिल्ली-लखनऊ की लड़ाई कुछ ज़्यादा ही आगे बढ़ गयी है क्या?”
यह पोस्ट यूपी की राजनीति में वायरल हो गया है। विश्लेषकों के मुताबिक, यह दो स्तरों पर हमला है:
- योगी सरकार की ‘बुलडोजर संस्कृति’ पर तंज – जहां अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने को विपक्ष ‘तानाशाही’ बताता रहा है।
- केंद्र (दिल्ली) और यूपी (लखनऊ) के बीच कथित अनबन – अखिलेश का इशारा है कि बीजेपी शीर्ष नेतृत्व और राज्य सरकार के बीच खींचतान बढ़ रही है।
विवाद की जड़: योगी की नई कवर इमेज
दरअसल, यह सब तब शुरू हुआ जब सीएम योगी आदित्यनाथ ने 12 फरवरी 2026 को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स (एक्स, इंस्टाग्राम आदि) की कवर इमेज बदल दी। नई इमेज में योगी आदित्यनाथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के साथ खड़े दिख रहे हैं (लखनऊ में बनी ब्रह्मोस यूनिट की बैकग्राउंड में)।
सरकार ने इसे ‘हार्ड पावर विजन’ और ‘नया उत्तर प्रदेश’ का संदेश बताया:
- यूपी अब सिर्फ एक्सप्रेसवे का नहीं, बल्कि रक्षा उत्पादन का वैश्विक हब बन रहा है।
- लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस की नई इंटीग्रेशन और टेस्टिंग फैसिलिटी से मिसाइल उत्पादन शुरू हो चुका है।
- 9.12 लाख करोड़ के रिकॉर्ड बजट 2026-27 के साथ विकास, सुरक्षा और निवेश का ‘त्रिवेणी मॉडल’ पेश किया जा रहा है – यूपी को भारत का ‘ग्रोथ इंजन’ और ‘सुरक्षा कवच’ बनाने का दावा।
बुलडोजर vs ब्रह्मोस: सियासी मायने
- अखिलेश यादव पिछले कई सालों से योगी सरकार पर ‘बुलडोजर राज’ का आरोप लगाते रहे हैं। अब ‘ब्रह्मोस’ को शामिल करके उन्होंने संकेत दिया कि योगी की ‘ताकत’ की छवि बदल रही है, लेकिन असल में केंद्र-राज्य में तनाव है।
- बीजेपी इसे विकास और आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक बता रही है, जबकि सपा इसे ‘शक्ति प्रदर्शन’ और राजनीतिक संदेश मान रही है।
- यह घटना 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दोनों पक्षों की ‘प्रतीक युद्ध’ को और तेज कर रही है।





