आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में सदर थाना के पुलिसकर्मियों पर एक महिला से छेड़छाड़ और अभद्रता का गंभीर आरोप लगा है। मामले में अदालत ने दो दरोगाओं, एक सिपाही और दो अन्य व्यक्तियों के खिलाफ परिवाद दर्ज करने के आदेश दिए हैं। सुनवाई तीन महीने बाद होगी, जिसमें सभी आरोपियों को जवाब देना होगा।
मलपुरा इलाके की निवासी एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि 7 सितंबर 2025 को सदर थाने की पुलिस टीम उनके घर पर दबिश देने पहुंची थी। यह दबिश महिला की ननद पर लगे पिस्टल चोरी के आरोप के सिलसिले में दी गई थी। महिला के पति ने सदर थाने में अपनी बहन (महिला की ननद) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें घर से पिस्टल और अन्य सामान चोरी का आरोप लगाया गया था।
महिला के अनुसार, दो कारों से पहुंची पुलिस टीम में सदर थाने के दरोगा मोहित चौधरी और आकाश धामा, सिपाही अंकित तथा दो अन्य व्यक्ति शामिल थे। टीम ने बिना किसी महिला पुलिसकर्मी की मौजूदगी के घर में प्रवेश किया।
आरोप है कि दरोगा मोहित चौधरी ने कमरे में घुसकर महिला के साथ अश्लील हरकतें कीं और अभद्र व्यवहार किया। महिला ने छेड़छाड़ और बदसलूकी के साक्ष्य भी पेश किए, जिनके आधार पर अदालत ने परिवाद स्वीकार किया।
पुलिस का कहना है कि दबिश वैध जांच का हिस्सा थी, लेकिन महिला की शिकायत में दिए गए साक्ष्यों ने मामले को गंभीर मोड़ दे दिया। अदालत ने शिकायत पर सुनवाई के आदेश दिए, जिसमें सभी पांच आरोपी पक्षकार हैं। सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन तीन महीने के अंदर होने की संभावना है। इस मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर महिला सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल की अनदेखी पर।
यह घटना आगरा में पुलिस मिसकंडक्ट के बढ़ते मामलों की कड़ी लगती है। हाल के महीनों में शहर के विभिन्न थानों से महिलाओं के साथ अभद्रता की शिकायतें सामने आई हैं, जैसे ट्रांस यमुना थाने में एक महिला की गिरफ्तारी के दौरान कथित मारपीट या अन्य इलाकों में छेड़छाड़ के केस। हालांकि, सदर थाने का यह मामला सीधे दबिश के दौरान महिला पुलिस की अनुपस्थिति पर केंद्रित है, जो कानूनी रूप से अनिवार्य है।
पुलिस विभाग ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन जांच की संभावना जताई जा रही है। महिला अधिकार संगठनों ने इस घटना की निंदा की है और सख्त कार्रवाई की मांग की है।























