आगरा। थाना किरावली के मिढ़ाकुर क्षेत्र के कराहरा गांव में 5 अगस्त 2025 को किसान बनवीर सिंह की रहस्यमयी मौत का राज तीन महीने से ज़्यादा बीतने के बाद भी पुलिस नहीं खोल सकी है। परिजनों की तहरीर, पोस्टमार्टम की रिपोर्ट और मौके के हालात साफ़ तौर पर हत्या की ओर इशारा करते हैं, लेकिन पुलिस की ढीली कार्यवाही ने पूरे गांव में आक्रोश पैदा कर दिया है।

मृतक के भाई हरेन्द्र सिंह ने 6 अगस्त को एफआईआर दर्ज कराते हुए स्पष्ट तौर पर हत्या की आशंका जताई थी। पोस्टमार्टम में भी मौत का कारण दम घुटना आया है, जो यह संकेत देता है कि गला दबाया गया, यानी हत्या की गई। इतना ही नहीं कमरे में सामान बिखरा पड़ा था, जो संघर्ष का साफ़ संकेत है। गले और हाथों पर चोटों के निशान भी कई सवाल खड़े कर रहे हैं।

किसान की आख़िरी रात, एक कॉल ने बढ़ाई रहस्य की परतें

4 अगस्त की रात 11 बजे तक बनवीर पड़ोसियों से बातचीत करने के बाद कमरे में सोने गए थे। इसी बीच देर रात किसी से फोन पर लंबी बातचीत भी हुई थी। आखिर वह कॉल किसका था? पुलिस तीन महीने में भी यह साधारण तथ्य क्यों नहीं निकाल पाई?

पत्नी लौटी, सामने पड़ी लाश, घर अस्त-व्यस्त

घटना की रात के बाद दूसरे दिन सुबह जब पत्नी आगरा से लौटीं, तो देखा कि पति का शव जमीन पर पड़ा है।
गले और हाथ पर चोट के निशान थे। पैरों में चप्पल थी और कमरे में सामान अस्त-व्यस्त पड़ा था। यह सब कुछ ‘स्वाभाविक मौत’ की नहीं, स्पष्ट हत्या की तस्वीर दिखाता है।

परिवार की तकलीफ, पुलिस का रवैया निराशाजनक

तीन महीने से परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है, लेकिन जांच अब तक सूत के धागे से भी नहीं बढ़ी। पुलिस न तो संदिग्धों से पूछताछ की दिशा में तेज़ी ला पाई और न ही फोन कॉल डिटेल्स खंगालने में चुस्ती दिखाई। गांव में साफ़ सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पुलिस किसका बचाव कर रही है? क्या किसान की हत्या फाइलों में ही दब जाएगी?

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