आगरा |गोविन्द पाराशर | जिला नजर
आगरा के आवास विकास कॉलोनी स्थित परशुराम चौक पर शनिवार को ब्राह्मण समाज के लोगों ने फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के नाम और कथानक के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों में से कुछ अर्द्धनग्न होकर, चोटी खोलकर और शंख बजाते हुए सड़क पर उतरे, जिसने पूरे इलाके में हलचल मचा दी। उनका आरोप है कि इस फिल्म के जरिए पंडित समाज और सनातन धर्म की छवि को जानबूझकर खराब किया जा रहा है, जहां एक धार्मिक पात्र को भ्रष्टाचार से जोड़कर पूरे समुदाय को बदनाम करने की साजिश रची गई है।
प्रदर्शन में सुनील शर्मा, मदन मोहन शर्मा समेत दर्जनों लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे, अभिनेता मनोज बाजपेयी और रुचिका शेखर कपूर पर सख्त कार्रवाई की मांग की, साथ ही फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की अपील की। यह विवाद Netflix पर आने वाली इस फिल्म के ट्रेलर रिलीज होने के बाद से देशभर में फैल गया है, जहां ब्राह्मण समाज ने इसे ‘समाज की छवि धूमिल करने की साजिश’ बताया है। ब्रज क्षेत्र में संतों ने प्रधानमंत्री मोदी को शिकायत की है, जबकि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के आदेश पर फिल्म पर FIR दर्ज की गई है।

गाजीपुर, भोपाल और अन्य शहरों में भी इसी तरह के प्रदर्शन देखे गए, जहां प्रदर्शनकारी पोस्टर लेकर स्लोगन लगा रहे थे और फिल्म की रिलीज रोकने की मांग कर रहे थे। आगरा के प्रदर्शनकारियों ने कहा कि फिल्म का टाइटल ही ‘घूसखोर’ जैसे शब्द से ब्राह्मण समाज को भ्रष्ट दिखाने का प्रयास है, जो अस्वीकार्य है।
फिल्म के निर्माताओं ने विवाद पर माफी मांगी है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सिर्फ माफी काफी नहीं, फिल्म का नाम बदलना और कथानक में बदलाव जरूरी है। मेकर्स ने टीजर डिलीट कर दिया है, लेकिन ब्राह्मण समाज की मांग है कि पूरी फिल्म पर बैन लगे। पुलिस ने प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने पर कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन विवाद बढ़ने की आशंका जताई है। अब सबकी नजरें फिल्म की रिलीज और सरकारी प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। क्या यह विवाद शांत होगा या और तेज होगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।





