आगरा: जिले के थाना साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह ने 200 से 250 निर्दोष लोगों के आधार कार्ड में हेरफेर करके फर्जी पहचान बनाई और प्राइवेट व सरकारी बैंकों से होम एप्लायंसेज, बाइक, स्कूटी, एसी, महंगे मोबाइल फोन आदि पर लोन स्वीकृत कराकर सामान बाजार में बेच दिया। कुल ठगी की राशि 2 से 2.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
मुख्य आरोपी नारायण चौरसिया उर्फ नितिन चौरसिया को गिरफ्तार कर लिया गया है। एडीशनल डीसीपी आदित्य कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि आरोपी 2021 से यह नेटवर्क चला रहा था। गिरोह हर महीने 2 से 3 लोगों को निशाना बनाता था। जांच में अब तक तीन सदस्यों की भूमिका सामने आई है – एक गिरफ्तार, बाकी फरार। पुलिस उनकी तलाश में दबिश दे रही है।
कैसे काम करता था स्कैम?
- आरोपी लोगों के आधार कार्ड की फोटो और डिटेल्स हासिल करते थे।
- नाम, पता, फोटो बदलकर फर्जी आधार तैयार करते थे (एक ही आधार नंबर पर कई नामों का इस्तेमाल)।
- फर्जी KYC से बैंक/फाइनेंस कंपनियों से लोन अप्रूव कराते थे।
- लोन से खरीदा सामान तुरंत कम कीमत पर बेचकर रकम हड़प लेते थे।
- प्राइवेट और सरकारी दोनों बैंकों को टारगेट किया गया।
बैंकिंग सिस्टम की खामियां उजागर सबसे बड़ा सवाल: केवाईसी और सत्यापन प्रक्रिया को कैसे बायपास किया गया? पुलिस अब बैंक ट्रेल, डिजिटल साक्ष्यों और फॉरेंसिक जांच कर रही है। संभावित पीड़ितों से संपर्क किया जा रहा है, जिन्हें पता भी नहीं कि उनके नाम पर लोन लिया गया। कई लोगों को EMI नोटिस आ रहे हैं, जबकि उन्हें कुछ पता नहीं।
पुलिस का आगे का प्लान
- फरार आरोपियों की तलाश और दबोचने की कार्रवाई।
- बैंक खातों की फॉरेंसिक जांच।
- फर्जी दस्तावेज बनाने वाले नेटवर्क की तलाश।
- अन्य पीड़ितों की पहचान और शिकायत दर्ज कराना।
पुलिस का साफ संदेश: “साइबर ठगी में कोई भी बख्शा नहीं जाएगा। जल्द पूरे गिरोह का खुलासा होगा।” यह मामला आधार सिक्योरिटी और बैंक KYC की कमजोरियों को फिर से उजागर करता है। लोग अपने आधार कार्ड की डिटेल्स शेयर न करें और नियमित चेक करें कि उनके नाम पर कोई लोन तो नहीं लिया गया।





