आगरा। बहुचर्चित नकली दवाइयों के बड़े जखीरे की बरामदगी से जुड़े मामले में बड़ा मोड़ आया है। हे मां मेडिको के संचालक हिमांशु अग्रवाल को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। स्थानीय अदालत द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद आरोपी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां सुनवाई के बाद अदालत ने रिहाई के आदेश जारी कर दिए।
मामला थाना कोतवाली में दर्ज है। केस के मुताबिक, सहायक औषधि आयुक्त (खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन) नरेश मोहन दीपक ने हिमांशु अग्रवाल के साथ–साथ यूनिस, वारिस, विक्की कुमार, सुभाष कुमार और फरहान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि उनकी मिलीभगत से बड़ी मात्रा में संदिग्ध और अवैध दवाओं की आपूर्ति की जा रही थी।
जांच तब और गहरा गई जब छापेमारी के दौरान 12 बोरे दवाइयां बरामद हुईं। मौके से पुलिस ने टेम्पो चालक आकीर मलिक निवासी सैंया को पकड़ लिया। पूछताछ में चालक ने बताया कि वह यह माल हे मां मेडिको के गोदाम तक पहुंचाने जा रहा था। उसने यह भी खुलासा किया कि यूनिस, वारिस और फरहान उसे दवाओं की सप्लाई थमाते थे और यदि रास्ते में कोई पूछताछ होती, तो वे “लेदर का माल” होने की बात कहकर निकल जाते थे।
इसके बाद एसटीएफ फील्ड इकाई के निरीक्षक यतीन्द्र शर्मा के नेतृत्व में विभिन्न जिलों के औषधि निरीक्षकों ने मोती कटरा स्थित सैय्यद गली के गोदाम पर बड़ी कार्रवाई की। छापेमारी में अतिरिक्त दवाइयों के कई सैंपल उठाए गए, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है।
स्थानीय अदालत ने गंभीर आरोपों को देखते हुए हिमांशु की जमानत पहले खारिज कर दी थी। इसके बाद आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश नारायण शर्मा ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की। सभी तथ्यों और दलीलों पर विस्तृत सुनवाई के बाद कोर्ट ने जमानत स्वीकार करते हुए उनकी रिहाई के आदेश जारी किए। इस फैसले के बाद अब पुलिस और औषधि विभाग की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें हैं।

