आगरा। दवा कारोबारी हिमांशु अग्रवाल को हाईकोर्ट से भले ही जमानत मिल गई है, लेकिन वह फिलहाल जेल से बाहर नहीं आएगा। आरोपी पर दर्ज तीन मामलों में से केवल एक में ही राहत मिली है। हिमांशु पिछले 45 दिनों से जेल में बंद है। हिमांशु अग्रवाल पर एंटी करप्शन एक्ट, नकली दवा बेचने और धोखाधड़ी कर दवा मंगाने, ले जाने जैसे गंभीर आरोप हैं। हाईकोर्ट ने कोतवाली थाने में दर्ज धोखाधड़ी वाले मामले में जमानत मंजूर की है, जबकि शेष दो मामलों की सुनवाई अभी जारी है।

हिमांशु के अधिवक्ता प्रकाश नारायण शर्मा ने कोर्ट में कहा कि आरोपी लाइसेंसधारी मेडिकल व्यापारी है और उसे आधारहीन आरोपों में फंसाया गया है। उनके अनुसार जिस ऑटो चालक ने 12 बोरी दवाओं का हवाला दिया, उसके पास ‘न्यू बाबा फार्मा’ के नाम का बिल मिला था, जिसका हिमांशु से कोई संबंध नहीं है। वकील ने कहा कि बरामद दवाओं में मिलावट नहीं मिली और आरोपी किसी रैकेट या गिरोह का हिस्सा नहीं है।

वहीं अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि जमानत मिलने पर आरोपी साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है और मुकदमे की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि अदालत में यह साबित करने के लिए ठोस आधार प्रस्तुत नहीं किया जा सका। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने हिमांशु को सशर्त जमानत प्रदान की। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी हर सुनवाई पर उपस्थित रहेगा तथा न तो साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेगा और न ही गवाहों को प्रभावित करेगा।

ड्रग विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर अतुल उपाध्याय ने बताया कि आरोपी पर तीन मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से केवल एक में ही जमानत दी गई है। उन्होंने कहा कि दवाओं के सैंपल की जांच में समय लगता है और कुछ रिपोर्ट जल्द मिलने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि 22 अगस्त को ड्रग विभाग की कानपुर एवं बस्ती मंडल की टीम ने एसटीएफ के साथ मिलकर आगरा की प्रमुख दवा मंडी में छापेमारी की थी। इस दौरान बंसल मेडिकल और हे मां मेडिकल स्टोर के गोदामों से करीब 3.23 करोड़ रुपये की दवाएं जब्त की गई थीं। हे मां मेडिकल से 3.5 करोड़ रुपये एवं बंसल मेडिकल से लगभग 1 करोड़ रुपये की दवाएं बरामद की गईं। एक डीसीएम वाहन भी मिला, जिसमें चेन्नई भेजे गए माल को लखनऊ के बजाय आगरा में उतारा गया था।

छापे के दौरान पांच बड़ी कंपनियों ग्लेनमार्क, सन फार्मा, जाइडस, सनोफी और यूएसवी की कथित नकली दवाएं भी मिलीं। इन दवाओं पर असली पैकिंग की तरह क्यूआर कोड चिपकाए गए थे, जो स्कैन करने पर फर्जी पाए गए। कुल 14 दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। कार्रवाई के बाद हिमांशु अग्रवाल पर आरोप है कि उसने मामले को दबाने के प्रयास में दवा एसोसिएशन के पदाधिकारियों के माध्यम से एसटीएफ और ड्रग अधिकारियों से संपर्क करवाया। बात न बनने पर उसने स्वयं एसटीएफ इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा को वॉट्सऐप कॉल कर “सेटिंग” का प्रस्ताव दिया। एसटीएफ ने इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी और निगरानी में आरोपी को पकड़ा। आरोपी 4 घंटे में 1 करोड़ रुपये जुटाकर तीन बैगों में लेकर पहुंचा था। एसटीएफ ने उसे थाने में ही रिश्वत राशि के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

दैनिक जिला नज़र – (नजरिया सच का) प्रिंट & सोशल मीडिया न्यूज़ नेटवर्क दैनिक जिला नज़र सत्यनिष्ठ पत्रकारिता और जनपक्षीय विचारधारा का विश्वसनीय मंच है। हम समाचारों को केवल प्रसारित नहीं करते—बल्कि उन्हें प्रमाणिकता, नैतिकता और गहन विवेक के साथ पाठकों तक पहुँचाते हैं। स्थानीय सरोकारों से लेकर राष्ट्रीय मुद्दों तक, हर सूचना को हम निष्पक्ष दृष्टि, आधुनिक संपादकीय मानकों और जिम्मेदार मीडिया आचरण के साथ प्रस्तुत करते हैं। प्रिंट की गरिमा और डिजिटल की गति—दोनों का संतुलित संगम है "जिला नज़र"। हमारा ध्येय है— सत्य को स्वर देना, समाज को दिशा देना। दैनिक जिला नज़र जहाँ समाचार विश्वसनीयता की भाषा बोलते हैं।

error: Content is protected !!
Exit mobile version