गड़वार (बलिया)। संत शिरोमणि श्री जंगली बाबा के महापरिनिर्वाण दिवस की शताब्दी को यादगार बनाने के लिए गड़वार स्थित श्री जंगली बाबा धाम पर निर्वाण शताब्दी महामहोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस पवित्र अवसर पर हरिहरात्मक महायज्ञ और श्रीमद्भागवत कथा का वाचन होगा, जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करेगा। श्री जंगली बाबा धाम सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस महोत्सव की तैयारियां पूरे जोश के साथ चल रही हैं।
विशेष बैठक में लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय
श्री जंगली बाबा धाम सेवा ट्रस्ट के प्रबंधक आचार्य राहुल उपाध्याय की संयोजकता में एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में महामहोत्सव की रूपरेखा तय की गई। निर्णय लिया गया कि आगामी 28 अक्टूबर से 7 नवंबर तक धाम परिसर में हरिहरात्मक महायज्ञ का भव्य आयोजन होगा। यह यज्ञ न केवल आध्यात्मिक महत्व का होगा, बल्कि समस्त जीवों के कल्याण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक की भागीदारी से बढ़ेगी रौनक
महायज्ञ के साथ-साथ इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध कथा वाचक पुंडरीक गोस्वामी महाराज द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का वाचन किया जाएगा। उनकी वाणी में वर्णित भगवान की लीला श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबो देगी। बैठक में उपस्थित पूज्य बालक बाबा ने यज्ञ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ से समस्त प्राणियों का कल्याण होता है तथा यह सृष्टि की रक्षा का माध्यम है। वहीं, नित्यानंद महाराज ने भी यज्ञ की विशेषताओं को विस्तार से समझाया, जो श्रोताओं को गहन आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेगा।
गणमान्य व्यक्तियों के सुझावों से मजबूत हुई योजना
बैठक में सौरभ कुमार, धनंजय उपाध्याय, शैलेश पांडेय, चित्रसेन सिंह, राकेश सिंह गामा सहित कई प्रमुख व्यक्तियों ने अपने मूल्यवान सुझाव दिए। इन सुझावों से महोत्सव की योजना और अधिक प्रभावी बनाई गई है। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु और स्थानीय निवासी उपस्थित रहे, जिनकी उत्साहपूर्ण भागीदारी ने कार्यक्रम की सफलता की नींव रखी। ट्रस्ट के प्रबंधक आचार्य राहुल उपाध्याय ने बताया कि यह महोत्सव श्री जंगली बाबा की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।
यह महामहोत्सव न केवल धार्मिक उत्सव होगा, बल्कि सामाजिक एकता और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक भी सिद्ध होगा। श्रद्धालु इस पवित्र अवसर पर बड़ी संख्या में भाग लेने के लिए उत्सुक हैं।





