आगरा: आगरा जिला न्यायालय में राणा सांगा विवाद से जुड़े चर्चित मामले में आज महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सिविल रिवीजन संख्या 119/2025 (अजय प्रताप सिंह आदि बनाम अखिलेश यादव आदि) की सुनवाई एमपी/एमएलए कोर्ट / अपर जिला जज-19 की अदालत में हुई। न्यायालय ने अब बहस के लिए 29 जनवरी 2026 की तारीख नियत कर दी है। यह सुनवाई निर्णायक मानी जा रही है, क्योंकि इससे मामले की आगे की कानूनी दिशा तय होगी।
मामले का बैकग्राउंड
यह केस मूल रूप से अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह (आर्य संस्कृति संरक्षण ट्रस्ट से जुड़े) द्वारा दायर सिविल सूट से शुरू हुआ था। उन्होंने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन (विपक्षी संख्या-2) पर आरोप लगाया कि उन्होंने राज्यसभा में राणा सांगा को “गद्दार” कहकर ऐतिहासिक तथ्यों का गलत प्रसार किया। वादी पक्ष ने बाबरनामा, लाहौर गजेटियर (1883-84) और अन्य दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि बाबर को भारत लाने वाला दौलत खान लोदी था, न कि राणा सांगा।
- मूल सिविल सूट मार्च 2025 में सीनियर डिवीजन कोर्ट में दायर हुआ।
- अप्रैल 2025 में सिविल जज सीनियर डिवीजन ने वाद को निरस्त कर दिया।
- वादी ने जिला जज कोर्ट में रिवीजन दायर किया, जो अब अपर जिला जज कोर्ट में चल रहा है।
- पहले भी कई सुनवाई हो चुकी हैं, जिसमें नोटिस जारी हुए, मिसलेनियस सूट दायर हुए और सुनवाई 11 जुलाई 2025 तक पहुंची थी।
आज की सुनवाई का विवरण
- आदेश 1 नियम 8 सीपीसी के तहत बहस के लिए आज तारीख थी।
- वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने मूल पत्रावली प्रस्तुत की।
- विपक्षी संख्या-2 रामजीलाल सुमन की ओर से अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने बहस के लिए समय मांगा और स्थगन प्रार्थना पत्र दिया।
- न्यायालय ने इस मांग को स्वीकार कर बहस हेतु 29 जनवरी तय की।
- सुनवाई में वादी पक्ष से अजय प्रताप सिंह तथा विपक्ष से रईसुद्दीन और राजेंद्र प्रसाद उपस्थित रहे।





