आगरा: ब्रज अंचल में मुगल अत्याचारों के खिलाफ अदम्य साहस दिखाने वाले अमर बलिदानी वीर गोकुला सिंह जाट के 356वें बलिदान दिवस पर आगरा किले के सामने उनकी प्रतिमा स्थल पर बड़ा आयोजन हुआ। अखिल भारतीय जाट महासभा के बैनर तले श्रद्धांजलि कार्यक्रम में आगरा, मथुरा, हाथरस, फिरोजाबाद और भरतपुर से सैकड़ों लोग पहुंचे। पुष्पांजलि, हवन यज्ञ और विचार गोष्ठी के साथ वीर गोकुला के साहस को नमन किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियां
- मुख्य अतिथि प्रताप चौधरी (पूर्व विधायक) ने कहा: औरंगजेब जैसे क्रूर शासक से लोहा लेना और अप्रशिक्षित सेना से तीन दिन युद्ध कर मुगल फौजदारों को हराना वीर गोकुला की असाधारण वीरता है।
- चौधरी बाबूलाल (पूर्व मंत्री व विधायक): महाराजा सूरजमल और जवाहर सिंह ने मुगलों को आगरा से खदेड़कर 13 साल शासन किया और विकास कार्य कराए। आगरा किले के सामने उनकी प्रतिमा न होना सर्व समाज का अपमान है।
- यशपाल राणा (बेबी रानी मौर्य के प्रतिनिधि): जल्द CM से मिलकर महाराजा सूरजमल की प्रतिमा, स्मृति द्वार और मेट्रो स्टेशनों के नाम ब्रज वीरों पर रखने की मांग करेंगे।
- हवन यज्ञ पंडित आलोक चौधरी ने संपन्न कराया।
बड़ा संकल्प: एक साल में प्रतिमा नहीं तो आगरा किले का घेराव!
विचार गोष्ठी में निर्णय लिया गया कि यदि एक वर्ष में सरकार महाराजा सूरजमल की प्रतिमा स्थापित नहीं करती, तो आगरा किले का घेराव किया जाएगा।
कार्यक्रम में कप्तान सिंह चाहर, गजेंद्र नरवार, सुरेंद्र चौधरी, निर्मल चाहर, राजेश चौधरी, दीपक चौधरी सहित कई पदाधिकारी और सर्व समाज के लोग मौजूद रहे। ब्रज के वीर योद्धाओं की गाथा सदैव प्रेरणा देती रहेगी!





