बाबू बालेश्वर लाल ने ग्रामीण पत्रकारों को दी नई पहचानः – डा.नरेशपाल सिंह
🔹 डा.भानुप्रकाश वर्मा पर दिखा भरोसा, पुनः बने जिलाध्यक्ष
बिजनौर। ग्रामीण भारत की धड़कनों को आवाज़ देने वाले उन योद्धाओं की सभा में, जहाँ कलम की स्याही खेतों की मिट्टी से रची जाती है, एक ऐसा क्षण उतरा जब इतिहास और वर्तमान एक-दूसरे के आलिंगन में बंध गए। गुरुवार को जनपद बिजनौर के ग्राम मोरना में स्थित भारत सेवाधाम परिसर में, महंत देवराज कमल की पवित्र अध्यक्षता और जिला महामंत्री जितेंद्र कुमार के कुशल संचालन में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश की जिला इकाई की बैठक ने न केवल संगठन की जड़ों को मजबूत किया, बल्कि एक नई ऊर्जा का संचार भी किया। यह सभा मात्र एक बैठक न थी, अपितु एक तीर्थयात्रा थी—जिसमें संस्थापक बाबू बालेश्वर लाल की जन्मजयंती का उत्सव, डॉ. भानुप्रकाश वर्मा का पुनः जिलाध्यक्ष पदभार ग्रहण और ग्रामीण पत्रकारिता की भावी दिशा का संकल्प, सब कुछ एक सूत्र में बंधा।
बैठक का शुभारंभ एक भावपूर्ण नमन से हुआ। मुख्यातिथि प्रदेश महामंत्री (संगठन) डॉ. नरेशपाल सिंह और कार्यवाहक जिलाध्यक्ष डॉ. भानुप्रकाश वर्मा ने संगठन के आदि पुरुष स्वर्गीय बाबू बालेश्वर लाल तथा मां सरस्वती के पावन चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन चढ़ाए। यह क्षण ऐसा था मानो ग्रामीण पत्रकारिता का सूर्योदय पुनः हो रहा हो—उन सूर्यों का, जिन्होंने अंधकारमय आंचलिक दुनिया में प्रकाश की किरणें बिखेरीं।

डॉ. नरेशपाल सिंह का मुख्य संबोधन तो एक काव्य-रचना सरीखा था, जिसमें बाबू बालेश्वर लाल के जीवन-दर्शन को उकेरा गया। उन्होंने कहा, “बाबू बालेश्वर लाल वह दीपक थे, जिनकी ज्योति ने ग्रामीण पत्रकारों को नई पहचान दी। 8 अगस्त 1982 को बलिया के छोटे-से कस्बे गड़वार में सात सादे-सपाट पत्रकार साथियों के साथ स्थापित यह संगठन आज वटवृक्ष की भांति न केवल उत्तर प्रदेश, अपितु कर्नाटक, उत्तराखंड सहित दस राज्यों में अपनी शाखाएँ फैला चुका है।” डॉ. सिंह ने भावुक स्वर में जोड़ा, “चार दशकों की उतार-चढ़ावपूर्ण यात्रा में यह एसोसिएशन उत्तर प्रदेश का सबसे प्रभावशाली संगठन बनकर उभरा है। दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यालय की स्थापना इसका प्रमाण है कि ग्रामीण पत्रकारिता अब राष्ट्रीय पटल पर अपनी विशिष्ट छाप छोड़ रही है। आंचलिक पत्रकारों को सशक्त पहचान दिलाने की यह सबसे बड़ी क्रांति है—एक क्रांति जो कलम की ताकत से जन्मी।”
इस संकल्प सभा में डॉ. भानुप्रकाश वर्मा का संबोधन भी कम प्रभावशाली न था। उन्होंने संगठन के प्रति लापरवाह सदस्यों पर कठोर शब्दों में नाराजगी जताते हुए कहा, “संगठन को वज्र की भांति अटल बनाना है, तो प्रत्येक सदस्य को एकजुट होकर कार्य में योगदान देना होगा। लापरवाही की जंजीरें तोड़ें, अन्यथा हमारी यात्रा अधर में लटक जाएगी।” उनके ये शब्द सभा में गूंजे, मानो एक आह्वान हो—एकता का, समर्पण का।

चर्चा के दौरान संगठन की जिला इकाई के चुनाव पर विचार-विमर्श हुआ। डॉ. आलम फरीदी ने डॉ. भानुप्रकाश वर्मा को पुनः जिलाध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित किया, जिसे सभी उपस्थित सदस्यों ने उत्साहपूर्ण तालियों और हाथ उठाकर स्वीकृत किया। यह निर्वाचन मात्र औपचारिकता न था, अपितु विश्वास का प्रमाण—एक ऐसे नेतृत्व पर, जो संगठन को नई ऊँचाइयों पर ले जाने को प्रतिबद्ध है। संयोजक धामपुर तहसील अध्यक्ष इंदर सिंह चौहान ने डॉ. वर्मा को शाल ओढ़ाकर बधाई दी, जबकि मुख्यातिथि डॉ. नरेशपाल सिंह, जिला महामंत्री जितेंद्र कुमार, जिला उपाध्यक्ष यशपाल सिंह, डॉ. आलम फरीदी और सेवा धाम के महंत देवराज कमल को भी सम्मानित कर सभा का समापन हुआ।
बैठक को संबोधित करते हुए जिला संगठन मंत्री गुणवंत सिंह राठौर, चांदपुर तहसील अध्यक्ष परम सिंह, नूरपुर ब्लॉक अध्यक्ष चौधरी शेर सिंह, बिजनौर तहसील प्रभारी अवनीश शर्मा, नरेश फौजी, सतवेंदर सिंह गुजराल, नीरज शर्मा, कमल सिंह ऋषि त्यागी, रामरतन सिंह, डॉ. मनोज कटारिया, पवन सिंह चौधरी आदि ने संगठन की मजबूती पर बल दिया। उनके शब्दों में एक स्वर था—ग्रामीण पत्रकारिता को सशक्त बनाना, समाज की नब्ज को पकड़ना और सत्य की ज्योति जलाए रखना।

सभा में नसीम सैफी, मन्नान सैफी, इदरीस अंसारी, प्रशांत कुमार, नरेश फौजी, बबलू चौहान, पंकज जोशी, ओमपाल प्रजापति, सतीश चौहान, बिजेंद्र शर्मा, बिरेंद्र चौधरी, मौहम्मद शाहिद, डॉ. थम्मन सिंह गहलोत, हकीम असराउल हक, नवाबुद्दीन उर्फ नवाब, डॉ. प्रदीप कुमार, फिरोज आलम, कामेंद्र कुमार, मनोज डबास, धर्मवीर दिवाकर, आशु शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, डॉक्टर प्रदीप कुमार, मोहम्मद आवेश, अरुण कुमार, वीरेश कुमार, थमन सिंह, अमर द्विवेदी, मुकेश शर्मा, नारायण किशोर शर्मा, परम सिंह आदि ने भाग लिया। बैठक का समापन डॉ. मनोज कटारिया एवं मोहम्मद अरशद को नवीन सदस्यता प्रदान कर हुआ—एक नई शुरुआत, जो संगठन को और विस्तृत बनाएगी।
यह सभा ग्रामीण पत्रकारिता के लिए एक मील का पत्थर सिद्ध हुई। बाबू बालेश्वर लाल की स्मृति में मनाया गया यह जन्मदिन न केवल एक उत्सव था, अपितु एक प्रतिज्ञा—कि ग्रामीण भारत की कहानियाँ कभी अनसुनी न रहें। संगठन की यह यात्रा जारी रहेगी, कलम की धार से समाज को निखारते हुए।






