आगरा: जिले के थाना शाहगंज एक बार फिर अवैध वसूली और पुलिस दुरुपयोग के आरोपों में घिर गया है। इस बार मामला एक सिपाही पर फोकस है, जबकि दरोगा पर कोई एक्शन नहीं हुआ। सराय ख्वाजा निवासी रईस खान ने आरोप लगाया कि थाने के दरोगा दीपक सोनी और सिपाही सनी मलिक ने 7 फरवरी को उनके घर पहुंचकर बिना किसी FIR के उन्हें सुबह 11:30 बजे थाने ले गए। 12 घंटे अवैध हिरासत में रखने के बाद 25 हजार रुपये ऑनलाइन वसूलकर रात में छोड़ा गया।
पीड़ित ने गुरुवार को डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास से शिकायत की, जिसके बाद जांच के आदेश दिए गए। प्राथमिक जांच में सिर्फ सिपाही सनी मलिक को लाइन हाजिर कर दिया गया है। दरोगा दीपक सोनी पर अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। डीसीपी ने कहा कि पीड़ित के बयान लिए जाएंगे और थाने के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
क्या है पूरा मामला? फाइनेंस कंपनी की रिकवरी बनी बहाना
रईस खान ने 2021 में करीब 10 लाख रुपये डाउन पेमेंट देकर एक जेसीबी (बुलडोजर) फाइनेंस पर खरीदा था। मासिक किस्त 74 हजार रुपये थी, लेकिन कुछ किस्तें बकाया रह गईं। फाइनेंस कंपनी ने थाना शाहगंज में प्रार्थना-पत्र दिया। थाना प्रभारी ने इसकी जांच दरोगा दीपक सोनी को सौंपी।
रईस का आरोप:
- 7 फरवरी को दरोगा और सिपाही घर आए और उन्हें थाने ले गए।
- कोई FIR दर्ज नहीं थी, फिर भी अवैध हिरासत में रखा।
- धमकाकर एक लाख रुपये मांगे, लेकिन बातचीत के बाद 25 हजार में सौदा हुआ।
- रात में एक सपा नेता थाने पहुंचे। पीड़ित ने उनसे बात की और रकम मांगी।
- रईस और उनके भाई ने नेता को रकम ऑनलाइन ट्रांसफर की, लेकिन नेता के कहने पर पैसे किसी और खाते में भेजे गए।
- एक पुलिसकर्मी ने नेता से बात की, उसके बाद रईस को हवालात से छोड़ा गया।
सूत्रों के मुताबिक, यह रकम पुलिस और बिचौलिये के बीच बांटी गई। पुलिस ने सीधे पैसे न लेकर दलाल के जरिए ट्रांसफर करवाया ताकि साक्ष्य मिट जाए।
पुलिस की प्रतिक्रिया और भेदभाव का आरोप
सिपाही सनी मलिक ने अधिकारियों से संपर्क कर दावा किया कि उनका कोई दोष नहीं। वे सिर्फ दरोगा के साथ गए थे और छोड़ने के समय मौके पर नहीं थे। लेकिन पीड़ित के बयान और शिकायत के आधार पर उन्हें लाइन हाजिर किया गया।
यह मामला यूपी पुलिस में “भेदभाव” का उदाहरण बन गया है – जहां निचले स्तर के कर्मचारी पर तुरंत एक्शन होता है, लेकिन उच्च अधिकारी बच निकलते हैं। थाना शाहगंज पहले भी कई वसूली, अवैध हिरासत और अन्य विवादों में सुर्खियों में रहा है।
सोशल मीडिया और लोकल रिएक्शन
मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं:
- “पुलिस अब फाइनेंस कंपनी की रिकवरी एजेंट बन गई? आम आदमी को डराकर पैसे वसूलना शर्मनाक है!”
- “सिपाही को लाइन हाजिर किया, दरोगा को क्यों बचाया जा रहा?”
- “शाहगंज थाने की बदनामी अब रोज की बात हो गई।”





