वाराणसी: कौन कहता है कि देवरानी-जेठानी में बनती नहीं? लेकिन यहां बनावट कुछ ज्यादा ही हो गई… और वो भी गलत रास्ते पर! पवित्र शहर वाराणसी में सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) के दौरान एक सनसनीखेज खुलासा हुआ, जहां सपनों की उड़ान ने कानून की दीवार से टकरा लिया।
परीक्षा हॉल में बैठी एक महिला, हाथ में पेन, आंखों में टीचर बनने का ख्वाब। लेकिन सच्चाई? वो कोई और थी! असली कैंडिडेट अर्चना यादव (27) की जगह उनकी जेठानी अंजू यादव (29) परीक्षा दे रही थीं। अंजू, आजमगढ़ के पहलवानपुर की रहने वाली, ने फर्जी दस्तावेजों से खुद को अर्चना के रूप में पेश किया। लेकिन तकनीक ने धोखा पकड़ लिया – बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन बार-बार फेल हो रहा था। सीबीएसई ऑफिस से दोबारा चेक करने के निर्देश आए, लेकिन मिसमैच बरकरार रहा।
महिला स्टाफ की मौजूदगी में पूछताछ हुई, और राज खुल गया। अंजू ने कबूल किया कि अर्चना पढ़ाई में कमजोर थीं, लेकिन टीचर बनने का सपना उनके दिल में बसता था। इसलिए, जेठानी ने देवरानी की मदद के नाम पर यह जोखिम उठाया। लेकिन आधार कार्ड की इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन भी फेल हो गई, जो फर्जी दस्तावेजों की पुष्टि करती है। नतीजा? पुलिस ने अंजू को परीक्षा केंद्र से ही गिरफ्तार कर लिया, जबकि अर्चना को उनके घर से हिरासत में ले लिया गया।
यह घटना न सिर्फ शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि पारिवारिक बंधनों की आड़ में होने वाले फ्रॉड को भी उजागर करती है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि ईमानदार कैंडिडेट्स का हक न मारा जाए।
सपना कितना भी बड़ा हो, रास्ता अगर गलत चुना तो मंजिल नहीं, सिर्फ मुसीबतें हाथ लगती हैं। क्या यह घटना शिक्षा में बढ़ते फ्रॉड का संकेत है





