फरवरी आते ही मजनू, गलियों में मँडराते हैं, जेबें खाली होती हैं, पर ख्वाब बड़े सजाते हैं।
— 𖤓 —
●रोज़ डे (Rose Day):
वो अस्सी रुपये का गुलाब,कल दस का बिकता था,
पहले उसी के दम पर, सच्चा प्यार टिकता था।
काँटे तो मुफ्त मिलते हैं, फूलों के दाम भारी हैं,
ये प्यार है या शायद फूलों की कालाबाजारी है।
— 𖤓 —
●प्रपोज़ डे (Propose Day):
दूसरे दिन घुटनों के बल, सब हाँ सुनने को मरते हैं,
कल किसी और से आज किसी और से कसमें भरते हैं।
रिजेक्शन का डर ऐसा है, जैसे बोर्ड का कोई परचा हो,
डर बस इस बात का है, कि फालतू में न खर्चा हो।
— 𖤓 —
●चॉकलेट डे (Chocolate Day):
तीसरे दिन तो मिठास का, ऐसा सैलाब आता है,
शुगर की फिक्र छोड़ो, बस कैडबरी का राज आता है।
अजीब विडंबना है देखिये, कड़वे रिश्तों के दौर में,
लोग वफ़ा ढूँढ रहे हैं, डार्क चॉकलेट के शोर में।
— 𖤓 —
●टेडी डे (Teddy Day):
चौथे दिन वो रुई का भालू, सोफे की शोभा बढ़ाता है,
दो दिन बाद वही टेडी, धूल की चादर ओढ़ सो जाता है।
इंसान को वक़्त नहीं देते, खिलौनों से दिल बहलाते हैं,
आशिक अपनी सारी कमाई, रुई के ढेर में लुटाते हैं।
— 𖤓 —
●प्रॉमिस डे (Promise Day):
पाँचवें दिन वादों की, झड़ी ज़ोरों से लगती है,
चाँद-तारे तोड़ लाऊँगा, ये बात सच्ची लगती है।
पर हकीकत तो ये है, कि वफ़ा उठाने का वादा नहीं होता,
और सात समंदर पार जाने का, इरादा नहीं होता।
— 𖤓 —
●हग डे और किस डे (Hug & Kiss Day):
छठे और सातवें दिन, नज़ाकत और बढ़ जाती है,
मर्यादा और शर्म की रेखा, थोड़ी सी थरथराती है।
बजरंग दल के खौफ में, पार्कों में जो छिपते हैं,
वही वीर योद्धा फिर, सिंगल होने पर लिखते हैं।
•─────༺༻─────•
● एंटी-वैलेंटाइन वीक
जब गुलाबी बुखार उतरता है, तब असली होश आता है,
फरवरी का दूसरा हफ्ता, हकीकत से मिलाता है।
कल तक जो बाबू-शोना थे, अब वो केस लगते हैं,
वैलेंटाइन के बाद वाले दिन, थोड़े कलेश लगते हैं।
— 𖤓 —
●स्लैप डे (Slap Day):
पंद्रह तारीख को सारा रोमांस, हवा हो जाता है,
इश्क़ का भूत थप्पड़ खाकर, फ़ना हो जाता है।
ये थप्पड़ गाल पर नहीं, गुमराह यादों पर पड़ता है,
जो कल तक सर चढ़ा था, वो अब पैरों में पड़ा रहता है।
— 𖤓 —
●किक डे (Kick Day):
सोलह को लात मारो, उन पुरानी कड़वी बातों को,
जो नींद उड़ा ले जाती थी, उन लंबी काली रातों को।
गिफ्ट वापस करने का कष्ट, अब उठाना छोड़ दो,
यादों को फुटबॉल बनाओ, और किक मार कर तोड़ दो।
— 𖤓 —
●परफ्यूम डे (Perfume Day):
सत्रह को आती है महक, ज़रा खुद की शख्सियत की,
अब ज़रूरत नहीं रही, किसी गैर की अहमियत की।
खुद को इतना महकाओ, कि एक्स को भी जलन हो जाए,
तुम्हारी खुशबू देख कर, उसका नया वाला मौन हो जाए।
— 𖤓 —
●फ्लर्टिंग डे (Flirting Day):
अठारह को फिर से पंख, ज़रा फड़फड़ाने लगते हैं,
मजनू पुराने पिंजरे से, बाहर आने लगते हैं।
ये रियल वाला इश्क़ नहीं, बस हल्की-फुल्की मस्ती है,
क्योंकि आज के दौर में, वफ़ा थोड़ी सस्ती है।
— 𖤓 —
●कन्फेशन डे (Confession Day):
उन्नीस को सच बोलने का, एक दौरा सा पड़ता है,
हमसे गलती हुई ये मानने को, दिल करता है।
कोई कहता है सॉरी, कोई कहता है तुम बेमिसाल हो,
कोई कहना चाहता है – ए करेजा तुम बड़ी बवाल हो।
— 𖤓 —
●मिसिंग डे (Missing Day):
बीस तारीख को थोड़ी, पुरानी टीस जागती है,
तन्हाई के साए में, याद फिर से भागती है।
पर ये याद प्यार की नहीं, बस खालीपन का बहाना है,
पुराने जख्मों को खुरच कर, खुद को फिर रुलाना है।
— 𖤓 —
●ब्रेकअप डे (Breakup Day):
इक्कीस को अंततः,आज़ादी का बिगुल बजता है,
बिना किसी रिलेशनशिप के, अब चेहरा सजता है।
न कॉल्स का झंझट, न मैसेज का है इंतज़ार,
मुबारक हो आपको, आप जीत गए ये जंग-ए-प्यार।।
— 𖤓 —
फरवरी बीतते-बीतते, जेब और दिल दोनों खाली हैं,आशिकों के चेहरों पर, अब छाई थोड़ी लाली है।





