वाराणसी|जिला नजर। प्रयागराज माघ मेला विवाद के बाद वाराणसी पहुंचे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मीडिया से बातचीत में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने सीएम के आचरण को शास्त्रों के अनुरूप नहीं बताते हुए कहा कि संन्यासी के लिए वेतन लेना निषिद्ध है और योगी को या तो मुख्यमंत्री पद छोड़ना चाहिए या अपनी संन्यासी परंपरा। शंकराचार्य ने योगी की तुलना ‘खलीफा’ से की, जो मुस्लिम पद्धति से बनता है, और आरोप लगाया कि वे सत्ता की लालच में हिंदू धर्म की मर्यादाओं का उल्लंघन कर रहे हैं।
शंकराचार्य ने कहा कि शास्त्रों में स्पष्ट है कि योगी या संन्यासी को वेतनभोगी पद पर रहना ‘शास्त्रीय संकट’ पैदा करता है। उन्होंने दावा किया कि योगी आदित्यनाथ खुद को हिंदू साबित करने में असफल रहे हैं और उन्हें इसकी पुष्टि के लिए 40 दिन का समय दिया गया था, जिसमें से 10 दिन बीत चुके हैं। बाकी 30 दिनों में यदि वे गो-रक्षा, गो-माता को ‘राज्य माता’ घोषित करने और बीफ निर्यात पर रोक जैसे कदम नहीं उठाते, तो आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। शंकराचार्य ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि धार्मिक और शास्त्रीय है, जिस पर समाज को गंभीर चर्चा करनी चाहिए।
यह विवाद प्रयागराज माघ मेला में शंकराचार्य को संगम स्नान से रोके जाने के बाद शुरू हुआ था, जहां उन्होंने प्रशासन पर अपमान का आरोप लगाया और मेला छोड़कर वाराणसी लौट आए। उन्होंने योगी सरकार पर गो-हत्या को बढ़ावा देने और मंदिरों के विध्वंस में चुप्पी साधने का भी आरोप लगाया, यहां तक कि सीएम को ‘औरंगजेब’ से तुलना की। सोशल मीडिया पर यह बयानबाजी तेजी से वायरल हो रही है, जहां एक ओर शंकराचार्य के समर्थक गो-रक्षा को मुद्दा बना रहे हैं, वहीं योगी समर्थक इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं। अयोध्या में एक संत ने शंकराचार्य को शहर में प्रवेश न देने की चेतावनी तक दी है।
इस घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां धार्मिक नेता और सरकार के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गो-रक्षा और संन्यासी की भूमिका जैसे मुद्दे आगामी चुनावों में प्रभाव डाल सकते हैं। योगी सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, जांच और कानूनी कदमों पर विचार हो रहा है। शंकराचार्य ने अपील की कि समाज ऐसे मुद्दों पर एकजुट होकर सनातन धर्म की रक्षा करे।





