फतेहाबाद/आगरा। यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त, अविरल और निर्मल बनाने के संकल्प के साथ ‘जल सहेली समिति’ की पदयात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है। 29 जनवरी को जालौन के पचनदा से शुरू हुई यह 500 किलोमीटर लंबी ‘अविरल-निर्मल यमुना अभियान’ पदयात्रा सोमवार को फतेहाबाद के बाजिदपुर स्थित एके गार्डन से रवाना होकर डौकी और कुण्डौल पहुंची। जहां स्थानीय ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं ने पुष्प वर्षा कर जल सहेलियों का भव्य स्वागत किया।
डौकी क्षेत्र में पहुंचते ही ग्रामीणों ने फूलों की वर्षा की और यमुना संरक्षण अभियान के प्रति अपना पूरा समर्थन जताया। जल सहेलियों ने वहां मौजूद लोगों से संवाद किया और जल संरक्षण, स्वच्छ पेयजल उपलब्धता तथा यमुना की निर्मलता बनाए रखने के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। ग्रामीणों ने कहा कि यमुना की सफाई से न केवल पर्यावरण बचेगा, बल्कि हमारी खेती और रोजगार भी सुरक्षित होंगे।
इसके बाद पदयात्रा कुण्डौल नगर पहुंची, जहां लखूम सिंह सहित स्थानीय निवासियों ने पुष्प वर्षा से स्वागत किया। डीएवी इंटर कॉलेज, कुण्डौल के एनसीसी कैडेट्स ने भी उत्साह के साथ पदयात्रा का स्वागत किया और लोगों से यमुना संरक्षण में जुड़ने की अपील की। जल सहेलियों ने स्कूल में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों से बातचीत की, उन्हें जल बचत के छोटे-छोटे उपाय बताए और कहा, “जल का संरक्षण और यमुना की स्वच्छता हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।”
पदयात्रा के दौरान ग्रामीणों और किसानों ने जल सहेलियों को क्षेत्र की गंभीर समस्याओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि खारे पानी की समस्या, गिरता भूजल स्तर और बढ़ता जल संकट खेती को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। भूमि की उर्वरता घट रही है, फसलें प्रभावित हो रही हैं। किसानों ने प्रशासन से यमुना किनारे कटान रोकने, प्रभावी जल संरक्षण योजनाएं लागू करने और भूजल रिचार्ज के उपाय करने की मांग की।
जल सहेलियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनकी यह पदयात्रा पचनदा से दिल्ली के वासुदेव घाट तक जारी रहेगी। रास्ते में गांव-गांव जाकर जागरूकता फैलाई जाएगी, यमुना प्रहरी कैडर बनाए जाएंगे और जनभागीदारी से नदी को बचाने का संदेश पहुंचाया जाएगा। यह अभियान न केवल यमुना को प्रदूषण मुक्त करने का है, बल्कि जल संकट से जूझते बुंदेलखंड और आसपास के इलाकों में जल जागरूकता का जन आंदोलन भी है।
- रिपोर्ट – सुशील गुप्ता





