आगरा। फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के उद्देश्य से लागू की गई आधार प्रमाणीकरण प्रणाली ने रजिस्ट्री कार्यालयों में नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। खासतौर पर नाबालिग बच्चों के नाम संपत्ति हस्तांतरण और रक्त संबंधियों के बीच पावर ऑफ अटॉर्नी के मामलों में तकनीकी खामियां आम लोगों को परेशान कर रही हैं। रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी तरह से प्रभावित हो गई है, जिससे दैनिक रजिस्ट्रेशन की संख्या में भारी गिरावट आई है।
वर्तमान रजिस्ट्री पोर्टल की तकनीकी सीमाओं के चलते, यदि कोई अभिभावक अपने नाबालिग बच्चे के नाम संपत्ति खरीदना चाहता है, तो बच्चे का आधार कार्ड अनिवार्य है। लेकिन प्रमाणीकरण के दौरान समस्या तब उत्पन्न होती है जब सिस्टम संरक्षक (गार्जियन) के बजाय बच्चे के बायोमेट्रिक डेटा की मांग करता है। नियमों के अनुसार, नाबालिग के लिए संरक्षक का अंगूठा या अन्य प्रमाणीकरण पर्याप्त होना चाहिए, लेकिन सॉफ्टवेयर में यह तालमेल नहीं बैठ रहा। नतीजतन, बच्चों के नाम होने वाली सभी रजिस्ट्रियां पूरी तरह से रुक गई हैं। इससे उन परिवारों को सबसे अधिक असुविधा हो रही है जो बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए संपत्ति उनके नाम ट्रांसफर करना चाहते हैं।
इसके अलावा, पावर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तारनामा) के मामलों में भी पोर्टल की खामियां साफ नजर आ रही हैं। पावर ऑफ अटॉर्नी देने वाले व्यक्ति का आधार सत्यापन तो सफलतापूर्वक हो जाता है, लेकिन उनके प्रतिनिधि (एटॉर्नी होल्डर) का प्रमाणीकरण सिस्टम द्वारा अस्वीकार कर दिया जाता है। साथ ही, गवाहों के आधार डेटा में विसंगतियां या सर्वर की समस्या के कारण कई दस्तावेज रजिस्टर्ड नहीं हो पा रहे। इन मुश्किलों ने रक्त संबंधियों के बीच संपत्ति प्रबंधन को जटिल बना दिया है।
सदर तहसील के पांच सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में सामान्य दिनों में प्रतिदिन 300 से अधिक दस्तावेजों की रजिस्ट्री होती थी। लेकिन आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य होने के बाद यह संख्या 40-50 प्रतिशत तक सिमट गई है। मंगलवार को स्थिति और भी खराब रही, जहां लोग सुबह से शाम तक कागजी कार्रवाई और पोर्टल की दिक्कतों से जूझते रहे, लेकिन अधिकांश बिना काम पूरा किए लौट गए। इससे न केवल आम नागरिकों का समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
सहायक महानिरीक्षक निबंधन योगेश कुमार ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “शुरुआती चरण में कुछ व्यावहारिक और तकनीकी चुनौतियां आ रही हैं। बच्चों के नाम संपत्ति हस्तांतरण और पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़ी समस्याओं का फीडबैक शासन को भेज दिया गया है। पोर्टल में आवश्यक संशोधन किए जा रहे हैं, जो जल्द ही लागू होंगे और प्रक्रिया सुचारू रूप से चलने लगेगी।”
भविष्य की योजनाएं: आइरिस स्कैन से मजबूत होगी सुरक्षा
फर्जीवाड़े को और कड़ाई से रोकने के लिए स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग नियमों को और सख्त करने की तैयारी में है। आधार प्रमाणीकरण के अलावा अब आइरिस स्कैन (आंखों की पुतलियों का स्कैन) को भी अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इससे बायोमेट्रिक सत्यापन और मजबूत होगा, और धोखाधड़ी की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। हालांकि, मौजूदा समस्याओं का समाधान होने तक नागरिकों को धैर्य रखने की सलाह दी जा रही है।
इस मुद्दे ने एक बार फिर डिजिटल प्रक्रियाओं में तकनीकी तालमेल की जरूरत को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी व्यवस्थाओं को लागू करने से पहले व्यापक टेस्टिंग और यूजर फीडबैक आवश्यक है, ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो।





