मुरैना/मप्र। जिला चिकित्सालय मुरैना की पीआईसीयू टीम ने एक बार फिर अपनी तत्परता और विशेषज्ञता से कमाल दिखाया है। 14 वर्षीय बालिका काजल (निवासी मुड़ियाखेरा, वार्ड क्रमांक-1) की जान बचाने में डॉक्टरों की टीम ने जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष जीत लिया। गंभीर कोमा और बेहद कम ऑक्सीजन लेवल वाली बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुकी है। यह घटना जिला चिकित्सालय की उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं का जीता-जागता प्रमाण है।
तेज बुखार के बाद अचानक बेहोशी की शिकार हुई 14 वर्षीय काजल को 10 जनवरी 2026 को जिला चिकित्सालय मुरैना के पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) में भर्ती कराया गया। भर्ती के समय उसकी स्थिति अत्यंत नाजुक थी:
- गहरे कोमा में थी।
- ऑक्सीजन सैचुरेशन मात्र 30-35% (सामान्य 95-100% होता है)।
- तीन दिनों से तेज बुखार के बाद स्थिति बिगड़ी।
सिविल सर्जन डॉ. गजेन्द्र सिंह तोमर ने बताया कि डॉक्टरों की त्वरित कार्रवाई और समन्वित प्रयासों से बच्ची की जान बचाई जा सकी।
उपचार की पूरी प्रक्रिया
- ड्यूटी पर मौजूद बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरेंद्र सिंह सिकरवार ने बिना देर किए बच्ची को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा।
- शॉक प्रबंधन के लिए तुरंत:
- फ्लूड थेरेपी
- इनोट्रोप्स और वैसोप्रेसर
- आईवी एंटीबायोटिक्स
- आवश्यकता अनुसार रक्त और प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन शुरू किया गया।
- उपचार के दौरान किडनी से जुड़ी जटिलताओं को समय रहते पहचाना और नियंत्रित किया।
- निरंतर निगरानी, दवाइयों और देखभाल से बच्ची धीरे-धीरे होश में आई।
- सामान्य भोजन लेने लगी, सभी अंगों की कार्यक्षमता में सुधार हुआ।
कुछ दिन पहले जीवन-मृत्यु के बीच झूल रही काजल आज पूरी तरह स्वस्थ है और मुस्कुराती हुई अपने घर लौट चुकी है। परिवार में खुशी की लहर है, और पूरे इलाके में जिला चिकित्सालय की टीम की तारीफ हो रही है।
टीम की सराहना
यह सफलता चिकित्सकों की तत्परता, त्वरित निर्णय क्षमता और पीआईसीयू टीम के समन्वय का नतीजा है। सिविल सर्जन डॉ. गजेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि जिला चिकित्सालय में उपलब्ध संसाधनों और डॉक्टरों की मेहनत से ऐसे कई गंभीर केस सफलतापूर्वक संभाले जा रहे हैं।
संदेश: समय पर इलाज जरूरी
डॉक्टरों ने अपील की है कि तेज बुखार, बेहोशी या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल पहुंचें। देरी जानलेवा साबित हो सकती है। यह केस सेप्सिस, दिमाग का संक्रमण या अन्य गंभीर बीमारियों में समय पर इलाज की अहमियत बताता है।
जिला चिकित्सालय मुरैना की यह सफलता सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता को दर्शाती है। काजल की मुस्कान पूरे स्टाफ के लिए सबसे बड़ा इनाम है। रीडर्स से अपील: क्या आपके इलाके में भी ऐसी सफलता की कहानियां हैं? कमेंट में बताएं और इस खबर को शेयर करें ताकि जागरूकता फैले।
- रिपोर्ट – जिला ब्यूरो चीफ मुरैना मुहम्मद इसरार खान





