आगरा। फतेहपुर सीकरी के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब न्यायालय में निर्णायक मोड़ पर है। लघुवाद न्यायालय, आगरा में विचाराधीन केस संख्या 113/2024 – श्री भगवान श्री कामाख्या माता आदि बनाम उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड आदि की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 7 फरवरी 2026 को होगी।
वादी पक्ष (योगेश्वर श्रीकृष्ण सांस्कृतिक अनुसंधान संस्थान ट्रस्ट) का दावा है कि फतेहपुर सीकरी (मूल नाम विजयपुर सीकरी) सिकरवार हिंदुओं की प्राचीन राजधानी थी। यहां स्थित सलीम चिश्ती दरगाह मूल रूप से सिकरवार हिंदुओं की कुलदेवी कामाख्या माता का गर्भगृह था, जबकि जामा मस्जिद उसी मंदिर का विस्तृत परिसर रही है।
ऐतिहासिक दावा और प्रमाण
अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह के अनुसार:
- विजयपुर सीकरी के अंतिम शासक राजा धामदेव सिकरवार थे।
- 1527 ईस्वी में राणा सांगा और बाबर के बीच खानवा युद्ध के बाद राजा धामदेव सीकरी छोड़कर गाजीपुर के गहमर क्षेत्र में बस गए।
- बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा में राजा धामदेव का उल्लेख “धरमदेव” के नाम से किया है।
- राजा धामदेव ने अपनी कुलदेवी कामाख्या माता का विग्रह साथ लेकर गहमर ले गए, जहां आज भी यह मंदिर स्थित है – इसे ऐतिहासिक प्रमाण बताया जा रहा है।
वर्तमान स्थिति और सुनवाई
- विपक्षी पक्ष: उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड, दरगाह सलीम चिश्ती प्रबंधन कमेटी और जामा मस्जिद प्रबंधन कमेटी।
- विपक्षी संख्या 2 और 3 ने आदेश 7 नियम 14 के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया है, जो विचाराधीन है।
- पिछली सुनवाई 15 जनवरी को मकर संक्रांति अवकाश के कारण स्थगित हुई थी।





