झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी रेलवे मंडल के सबसे बड़े अस्पताल में 29 अगस्त की शाम दो घोड़ों के घुसने से मरीजों और स्टाफ में दहशत फैल गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें घोड़े अस्पताल के गलियारों, वार्डों, रेडियोलॉजी विभाग और सीएमएस ऑफिस तक दौड़ते नजर आ रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों ने डर से वार्डों के दरवाजे बंद कर लिए, जबकि डॉक्टर और नर्स भी सुरक्षित स्थानों पर भागे। वीडियो में एक व्यक्ति को यह कहते सुना जा सकता है, “रेलवे अस्पताल कम, पशु अस्पताल ज्यादा लग रहा है।”

यह घटना 29 अगस्त की शाम करीब 4 बजे की है। वायरल वीडियो, जिसे एक मरीज के परिजन ने बनाया, में साफ दिख रहा है कि दो घोड़े अस्पताल के गलियारों में बेरोकटोक घूम रहे हैं। करीब 30 मिनट तक अस्पताल परिसर में घोड़ों का “रेसकोर्स” बना रहा, जिसके बाद वे पोस्टमॉर्टम हाउस की ओर जाने वाले गेट से बाहर निकल गए। इस दौरान मरीजों, खासकर गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बुजुर्गों में डर का माहौल रहा।

सोशल मीडिया पर आक्रोश

वीडियो के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल होने के बाद जनता ने रेलवे प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए। एक यूजर ने एक्स पर लिखा, “कृपया अस्पताल सुपरिटेंडेंट इस पर कड़ा एक्शन लें। अस्पताल में गर्भवती महिलाएं, नवजात, बच्चे और बुजुर्ग हैं। ये आवारा पशु किसी को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह प्रशासन की निंदनीय लापरवाही है।” लोगों ने इसे “पशु अस्पताल” और “घुड़साल” कहकर तंज कसा।

रेलवे प्रशासन का जवाब

रेलवे प्रशासन ने एक्स पर जवाब देते हुए कहा, “मंडल चिकित्सालय में सुरक्षा व्यवस्था के लिए फाइल प्रक्रियाधीन है। कैटल कैचर के लिए रेलिंग लगाने का प्रस्ताव भेजा गया है।” इस जवाब को जनता ने अजीबोगरीब और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। रेलवे पीआरओ मनोज कुमार ने कहा, “ऐसी घटना दोबारा न हो, इसका ध्यान रखा जाएगा। व्यवस्थाओं को और बेहतर किया जाएगा।”

पहले भी आवारा पशुओं की घटनाएं आई हैं

यह पहली बार नहीं है जब झांसी रेलवे अस्पताल में आवारा पशुओं के घुसने की घटना सामने आई है। इससे पहले भी कुत्तों के घूमने का एक वीडियो वायरल हुआ था, लेकिन तब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की कमी और खुले गेट आवारा पशुओं के प्रवेश का कारण हैं।

जनता की मांग

  • अस्पताल परिसर में आवारा पशुओं के प्रवेश को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।

  • सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रेलिंग और गेट लगाए जाएं।

  • जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही के लिए कार्रवाई हो।

  • मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी की जाए।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

पुलिस ने इस मामले में अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की है, लेकिन रेलवे प्रशासन ने आंतरिक जांच शुरू करने का आश्वासन दिया है। अस्पताल के सीएमएस और सुरक्षा कर्मियों से जवाब-तलब किया गया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

यह घटना न केवल रेलवे अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को उजागर करती है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। जनता अब प्रशासन से ठोस कदमों की उम्मीद कर रही है।

  • रिपोर्ट – नेहा श्रीवास

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