गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के कमला नेहरू नगर स्थित पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में रविवार को एक प्रतियोगी परीक्षा के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया। परीक्षा देने आईं कई हिंदू महिलाओं ने मंगलसूत्र और बिछिया (पैर की अंगुलियों में पहनी जाने वाली अंगूठी) उतारने के नियम का कड़ा विरोध किया। महिलाओं का कहना है कि ये उनके वैवाहिक सम्मान, आस्था और सनातन धर्म के प्रतीक हैं, जिन्हें वे किसी भी कीमत पर नहीं हटाएंगी—चाहे परीक्षा छूट जाए या नौकरी का मौका हाथ से निकल जाए।
घटना की शुरुआत तब हुई जब परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा जांच के दौरान महिलाओं से धातु से बने आभूषण हटाने को कहा गया। महिलाओं ने आरोप लगाया कि अन्य परीक्षाओं में ऐसे आभूषणों पर टेप लगाकर या वैकल्पिक जांच के बाद प्रवेश की अनुमति दी जाती है, लेकिन यहां मेटल डिटेक्टर की आड़ में इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया। विरोध इतना बढ़ गया कि केंद्र के गेट पर काफी देर तक हंगामा चलता रहा, और कई महिलाएं परीक्षा हॉल में प्रवेश किए बिना ही लौट गईं।
महिलाओं की आपत्ति और आरोप
विरोध करने वाली महिलाओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम सनातन धर्म में निर्धारित वैवाहिक गरिमा के प्रतीकों को नहीं हटाएंगी, भले नौकरी चली जाए या परीक्षा।” उनका तर्क था कि मंगलसूत्र और बिछिया केवल आभूषण नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक पहचान और वैवाहिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। एक महिला ने कहा, “अगर बुर्का या हिजाब पहनकर प्रवेश की अनुमति है, तो मंगलसूत्र से क्या समस्या?” महिलाओं ने विद्यालय के उप-प्राचार्य इकबाल नासिर पर नियमों को अनावश्यक रूप से सख्ती से लागू करने का आरोप लगाया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
स्कूल प्रशासन की भूमिका और प्रतिक्रिया
पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, जो केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के अंतर्गत आता है, में इस तरह के नियम परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बताए जाते हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और पोस्ट्स में महिलाओं को गेट पर रोके जाने और बहस करते दिखाया गया है। उप-प्राचार्य इकबाल नासिर का नाम बार-बार आ रहा है, लेकिन स्कूल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। गाजियाबाद पुलिस को सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची, लेकिन कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई।
सोशल मीडिया पर बहस और व्यापक प्रतिक्रिया
यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई है, जहां इसे धार्मिक भेदभाव और सांस्कृतिक असंवेदनशीलता से जोड़कर देखा जा रहा है। कई यूजर्स ने तुलना की कि जहां मुस्लिम महिलाओं को बुर्का या हिजाब में प्रवेश की अनुमति दी जाती है, वहीं हिंदू प्रतीकों पर सख्ती क्यों? ट्विटर (अब X) पर #Hinduphobic और #Ghaziabad जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कुछ लोगों ने इसे पुरानी घटनाओं से जोड़ा, जैसे तेलंगाना में 2022 में इसी तरह का विवाद।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ और नियम?
परीक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, एसएससी, यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में धातु से बने आइटम्स पर प्रतिबंध आम है, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था जैसे टेपिंग या अलग जांच की सुविधा दी जाती है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अगर शिकायत मिली तो जांच हो सकती है। यह मामला सुरक्षा नियमों और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन का सवाल उठाता है।
इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा केंद्रों पर सांस्कृतिक संवेदनशीलता की जरूरत पर बहस छेड़ दी है। महिलाओं का विरोध न केवल व्यक्तिगत आस्था का मुद्दा है, बल्कि समानता और सम्मान की मांग भी।

