आगरा: जिले में आज एक ऐसी शादी हुई, जो सिर्फ रिश्तों की नहीं, बल्कि समझदारी, सपनों और महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन गई। आमतौर पर शादी के अगले दिन दुल्हन की विदाई ससुराल की चौखट पर होती है, लेकिन अनीशा की विदाई सीधे इंटरव्यू हॉल में हुई। ये कहानी लाल जोड़े में आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत की है।

प्यार से शादी तक का सफर:

लादूखेड़ा निवासी मनोज कुशवाहा (साइबर कैफे चलाते हैं) और अनीशा तीन महीने पहले मिले थे। अनीशा किसी काम से मनोज के कैफे आईं, बातचीत शुरू हुई, दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे। परिवारों ने सहमति दी और 21 फरवरी को धूमधाम से शादी हो गई।

इंटरव्यू की टेंशन:

शादी से एक दिन पहले अनीशा को पता चला कि रविवार (22 फरवरी) को बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी वर्कर/सहायक पद के लिए उसका इंटरव्यू है। दुल्हन के लिबास में अनीशा ने मनोज से कहा, “शादी के तुरंत बाद गांव से शहर जाना मुश्किल है, इंटरव्यू छोड़ देना बेहतर होगा।” लेकिन मनोज ने साफ इंकार किया और कहा, “तुम परेशान मत हो, रास्ता निकल जाएगा।”

परिवार की समझदारी:

मनोज ने तुरंत घरवालों से बात की। सबने मिलकर फैसला किया कि फेरे और रस्में समय से जल्दी पूरी कराकर विदाई कर दी जाए। विदाई के बाद जहां आमतौर पर दुल्हन ससुराल जाती है, वहीं मनोज ने अपनी नवविवाहिता को कार से सीधे आगरा जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन (संजय पैलेस) ले जाकर इंटरव्यू दिलाया।

लहंगे में इंटरव्यू का नजारा:

विकास भवन पहुंचते ही अनीशा ने दुल्हन के लाल जोड़े, घूंघट और मेहंदी लगे हाथों में ही इंटरव्यू दिया। ये दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए खास बन गया – लोग फोटो खींचने लगे, भीड़ जुट गई। एक ओर सुहाग का जोड़ा, दूसरी ओर आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत। इंटरव्यू पूरा होने के बाद अनीशा पति के साथ ससुराल के लिए रवाना हुई – इस बार सिर्फ दुल्हन नहीं, बल्कि सपनों की ओर बढ़ती एक आत्मविश्वासी युवती के रूप में।

मनोज का संदेश – “पत्नी अपने पैरों पर खड़ी हो”:

मनोज ने कहा, “मैं चाहता हूं कि मेरी पत्नी अपने पैरों पर खड़ी हो। उसने जो सपने देखे हैं, उन्हें पूरा करने में मैं उसका साथ दूंगा। शादी सिर्फ साथ निभाने का वादा नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी भी है।” ये बातें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जहां लोग इसे महिला सशक्तिकरण की मिसाल बता रहे हैं।

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