आगरा। एसटीएफ और ड्रग विभाग के रविवार से जारी छापे में पकड़े गए दवा माफियाओं का दक्षिण भारत से कनेक्शन सामने आया है। दक्षिण के दवा माफियाओं के साथ मिलकर नकली दवाएं तैयार कर बाजार में बेची जा रही थीं। करोड़ों की दवाएं मंगाकर यूपी के कई शहरों के साथ ही कई अन्य राज्यों में बेचा जाता था। तीन दिन चली कार्रवाई में एसटीएफ ने 3.50 करोड़ की नकली दवाएं जब्त की।

इस दौरान एक आरोपी ने जांच टीम को एक करोड़ रुपये की रिश्वत देने की भी कोशिश की। जांच टीम ने उसे रिश्वत देने के लिए लाए गए एक करोड़ रुपयों के साथ गिरफ्तार कर लिया।

दवा कंपनियों द्वारा उनकी दवाओं के नाम पर नकली दवाएं बनाकर बेचे जाने की शिकायत प्रदेश के औषधि विभाग से की थी। इससे पहले कंपनियों ने अपने स्तर से भी जांच कराई, इसमें नकली दवा तैयार करने की जानकारी हुई। शिकायत के बाद राज्य मुख्यालय से औषधि विभाग और एसटीएफ की टीमें गठित की गईं। इन टीमों ने 20 दिन तक जांच की, इसके बाद विगत शुक्रवार को छापेमार कार्रवाई की।

शुक्रवार को फव्वारा बाजार स्थित बंसल मेडिकल और हेमा मेडिको पर छापा मारा गया, रात में दुकान और दोनों के गोदाम सील कर दिए थे। इसी दौरान टीम को 87 लाख रुपये की एंटी एलर्जिक दवाएं भी दवा बाजार में ऑटो रिक्शा में मिली थी जिन्हें बंसल मेडिकल पर उतारा जाना था। अगले दिन शनिवार को टीम ने पहले हेमा मेडिको के मोती कटरा गोदाम पर कार्रवाई की।

कार्रवाई के दौरान संचालक हिमांशु अग्रवाल ने एक करोड़ रुपये देकर नकली दवा गोदाम से हटाने की पेशकश की। एसटीएफ इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा ने अधिकारियों से बात की इसके बाद प्लानिंग कर हिमांशु अग्रवाल को एक करोड़ रुपये की रिश्वत के साथ पकड़ लिया गया।

सहायक औषधि आयुक्त नरेश मोहन दीपक ने बताया कि आरोपी से पूछताछ के बाद उसके नेटवर्क का पता चला। अब पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की धरपकड़ की तैयारी की जा रही है।

रिपोर्ट -गोविंद पाराशर

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