बाह/आगरा। वह बोला था अभियान को कैसे बल मिले खुद ही बोल समाधान भी दिया वह एक मैच सद्भावना बाला अर्थात मैत्री पूर्ण मैच के रूप में। क्रिकेट मैच। हमारे एक टीम के सदस्य की संगत का हवाला दिया। मैने सहमति दे अपने सचिव का नाम बताया।। बह सक्रिय हुए तो मुझे अपना बीता या हो आस।

जोश देख सहर्ष समर्पण भाव पैदा हुआ। आज की प्रणाली यानी टेनिस बाल की क्रिकेट। मुझे अटपटा लगा। समय और पाबंदिया कुछ ज्यादा देख संवाद तक सहयोग फिक्स हो गया।

अब जाऊँ कि तब की पिनक में व्यवधान रोज होने बाली बातों ने दूर किए। एक मैच से दो अथित के बनते जैसे ही अथित बीच में सद्भावना मैच स्पर्धा में बदलता दिखा। तब हमने ओल्ड और न्यू का आपस मे खेलने को कहा मगर एक दूसरे से खेलना तय हुआ। इनाम का हल मेरा किट बाला प्रस्ताव बना। टी शर्ट रमेश जी के माध्यम से मिली मगर जब दो मैच होगये तो सिद्धांत राज स्कूल से ही शर्ट जुटाई। सबसे पहले मंडी का यार्ड मैदान तय था मगर बाद में बन्टी बरुआ के भट्टे के सामने एक खाली खेत में तय किया गया।

जिला बनाओ और स्टेडियम जैसी जरूरतें हल करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार की बनती है मगर….. एहसास बदलने का भरपूर कोशिश मेच बाले दिन तक जारी रहीं। हमने खेल के मजाक में सहयोग देने से सचिव को सक्रिय नहीं होने को मना लिया। एक को कप्तान बना मना लिया यहाँ से आयोजन सफलता के कदम तय करने लगा। उनके द्वारा मुझे मीडिया प्रभारी बना जिम्मेदारी नियत कर दी।

मैच बाले दिन तो मैं अपनों के बीच अंजान बन गया। दानवीर प्रमुख। नियम अनुशासन आयोजन में भंग दंग रह गया और मन उचटने लगा। मुझे प्रतीक चिन्ह, उद्घाटन, मैच में पहली गेंद फेकने का सौभाग्य मिला। हां मेरा मन स्थिर रहा एक बात से कि जिला और स्टेडियम की मांग में जो जिला केवल मुद्दा रह जाता।

इस आयोजन का उसमें स्टेडियम शामिल रख सका। एंग्री यूथ कानारा जो जिला बनाओ था उसमें स्टेडियम को भी शामिल करा लिया। जैतपुर की टीमें मैच जीतीं। उन्हे बधाई। और बी सी ए को खेलने के साथ हारने की बधाई । वाकई में सफल रहा सदभावना क्रिकेट मेच। जिसमें हम आम जन को अपने अभियान के साथ खड़ा कर सके।

मुख्य अथित पहले मैच के वीरेश राज शर्मा जेल अधीक्षक ने जिला और स्टेडियम न बन पाने की जो बजहें गिनाई उनमें क्षेत्र का नेतृत्व सही हातों मे न होना, क्षेत्र की जाती गति राजनीति और शिक्षा का अभाव।

वहीं दूसरे मैच के अथित हरिओम पांडेय एडवोकेट ने जिला और स्टेडियम के न बन पाने के लिए सिस्टम को जिम्मेदार ठहराया।
और मेरी नजर में क्षेत्रीय जन प्रतिनिधि का अपना अनिर्णय पूर्ण व्यवहार दोषी है।

  • रिपोर्ट – शंकर देव तिवारी

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