आगरा: उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अब आगरा में सख्ती से लागू हो रही है। निर्धारित समयसीमा (31 जनवरी 2026) तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अपडेट न करने वाले 35 विभागों के करीब 7 हजार सरकारी कर्मचारियों का फरवरी माह का वेतन पूरी तरह रोक दिया गया है।
प्रशासन के अनुसार, सभी राज्य कर्मचारियों को हर साल 31 जनवरी तक अपनी और परिवार की चल-अचल संपत्तियों (जमीन, मकान, फ्लैट, वाहन, बैंक बैलेंस, शेयर, सोना-चांदी आदि) का पूरा ब्योरा ehrms.upsdc.gov.in (मानव संपदा पोर्टल) पर ऑनलाइन दर्ज करना अनिवार्य है। इस बार डेडलाइन बीतने के बाद विभागीय समीक्षा में बड़ी लापरवाही सामने आई, जिसके बाद शासन के सख्त निर्देश पर वेतन रोकने का फैसला लिया गया।
क्यों उठाया गया यह कदम?
अधिकारियों का कहना है कि यह महज एक औपचारिक कार्रवाई नहीं है। सरकार आय से अधिक संपत्ति, अनियमित खर्च और भ्रष्टाचार पर नजर रखने के लिए इस डेटा का इस्तेमाल कर रही है। यदि किसी कर्मचारी की संपत्ति और खर्च में असंगति पाई गई, तो आगे गहन जांच, विभागीय कार्रवाई और अनुशासनात्मक दंड भी हो सकता है।
क्या है राहत का रास्ता?
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही कर्मचारी पोर्टल पर अपना सही और पूरा विवरण अपडेट कर देंगे, वेतन बहाली की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो जाएगी। हालांकि, जानबूझकर गलत जानकारी देने या लगातार लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है।
इस सख्ती से आगरा के सरकारी महकमों में हड़कंप मचा हुआ है। बड़ी संख्या में कर्मचारी अब पोर्टल पर लॉगिन करके विवरण अपडेट करने में जुट गए हैं। कई विभागों में अफसर अपने अधीनस्थों को फोन और मैसेज के जरिए तुरंत अपडेट करने की हिदायत दे रहे हैं।
प्रदेश स्तर पर भी बड़ा एक्शन
आगरा में 7 हजार कर्मचारियों के अलावा पूरे उत्तर प्रदेश में 68 हजार से ज्यादा राज्यकर्मियों का वेतन इसी वजह से रोका गया है। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है। सरकार का साफ संदेश है — पारदर्शिता नहीं तो वेतन नहीं।

