आगरा। बंदरों की दहशत ने ताजनगरी को हिलाकर रख दिया है। आज एक ही दिन में दो बड़े हादसे हुए हैं, जिसमें एक महिला की मौत हो गई और एक इंटरमीडिएट छात्र गंभीर रूप से घायल होकर ICU में है।

शाहदरा क्षेत्र में छात्र पर हमला

शाहदरा इलाके में दोपहर के समय बंदरों के झुंड आपस में लड़ रहे थे। इसी दौरान छत पर बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहा एक इंटरमीडिएट छात्र (नाम अभी गोपनीय) पर अचानक हमला हो गया। बंदरों ने धक्का दिया, जिससे छात्र संतुलन खो बैठा और छत से नीचे गिर पड़ा।

  • सिर, नाक और आंखों में गंभीर चोटें आईं।
  • परिजनों ने तुरंत निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने ICU में भर्ती किया।
  • छात्र की हालत नाजुक बताई जा रही है। छात्र रोजाना छत पर शांत जगह पर पढ़ाई करता था, लेकिन अब इलाके में डर का माहौल है।

वेस्ट अर्जुन नगर में महिला की मौत

सुबह वेस्ट अर्जुन नगर (थाना शाहगंज) में 62 वर्षीय विरमा देवी (पत्नी चरण सिंह) छत पर गई थीं। बंदरों के झपट्टे से संतुलन बिगड़ने पर तीसरी मंजिल से गिर गईं। मौके पर ही मौत हो गई। परिवार और मोहल्ले में कोहराम मचा हुआ है।

इलाकों में बढ़ता आतंक

स्थानीय लोगों का कहना है:

  • पिछले तीन महीनों में शाहदरा और आसपास 8-10 लोगों को बंदर काट चुके हैं।
  • बंदरों की लड़ाई, हमले और छतों पर उत्पात से लोग छतों पर जाना तक छोड़ चुके हैं।
  • बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित।
  • कपड़े सुखाना, काम करना या बाहर निकलना जोखिम भरा हो गया है। लोगों ने कई बार नगर निगम, वन विभाग और पुलिस में शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

लोगों की मांगें और आक्रोश

हादसों के बाद इलाकावासियों ने प्रदर्शन की धमकी दी है। मुख्य मांगें:

  • बंदरों को तुरंत पकड़कर जंगल में स्थानांतरित किया जाए।
  • नसबंदी अभियान और सुरक्षित शिफ्टिंग
  • इलाकों में नियमित गश्त और बंदर-रोकथाम टीम तैनात हो।
  • प्रभावित परिवारों को मुआवजा और सुरक्षा।
  • प्रशासन से लिखित आश्वासन कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

प्रशासन की नाकामी?

आगरा के कई इलाकों (शाहदरा, शाहगंज, सिकंदरा, ताजगंज) में बंदरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कचरा प्रबंधन की कमी, बाजारों से निकटता और लोगों द्वारा बंदरों को खिलाने से समस्या बढ़ी है। वन विभाग समय-समय पर पकड़ने की कोशिश करता है, लेकिन पर्याप्त नहीं। ये घटनाएं प्रशासनिक लापरवाही का सबूत हैं – क्या अब जागेंगे अधिकारी?

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