मौनी अमावस्या से 6 दिन से धरने पर बैठे, तेज बुखार, वैन में आराम; वसंत पंचमी स्नान पर अड़ा रहेगा?

प्रयागराज। माघ मेले में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का धरना अब स्वास्थ्य संकट में बदल गया है। मौनी अमावस्या (18 जनवरी) से लगातार 6 दिनों से खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे शंकराचार्य को शुक्रवार को तेज बुखार आ गया। उनकी तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही शिष्यों, समर्थकों और संत समाज में चिंता का माहौल बन गया है। फिलहाल वे अपने वैन में आराम कर रहे हैं और दिन में केवल दो बार पालकी पर बाहर आ रहे हैं।

क्या है पूरा विवाद?

मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन ने उन्हें पालकी में संगम स्नान के लिए आगे बढ़ने से रोका। शंकराचार्य का आरोप है कि इस दौरान उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट हुई। नाराज होकर उन्होंने धरना शुरू कर दिया और स्पष्ट कहा – जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता, वसंत पंचमी का स्नान नहीं करेंगे। प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर “शंकराचार्य” टाइटल के इस्तेमाल पर सवाल उठाया (सुप्रीम कोर्ट में केस लंबित होने के कारण), और शांति भंग का आरोप लगाया। मेला प्रशासन ने दो नोटिस भेजे, जिसमें धमकी दी कि लैंड अलॉटमेंट रद्द किया जा सकता है और स्थायी प्रतिबंध लग सकता है।

सवा लाख शिवलिंगों का संकल्प अधूरा

शंकराचार्य छत्तीसगढ़ के लक्षेश्वर धाम में 1.25 लाख शिवलिंगों की स्थापना से पहले इन्हें प्रयागराज लाकर श्रद्धालुओं के दर्शन और पूजन की योजना बना रहे थे। लेकिन विवाद के कारण शिविर में कुछ शिवलिंग ही पहुंचे हैं, बाकी कार्टूनों में पैक पड़े हैं। एक और खेप आने वाली है, लेकिन स्थिति ऐसी है कि पूजन और साधना रुकी हुई है। श्रद्धालु नाराज हैं और शिवलिंगों की स्थिति देखकर दुख जता रहे हैं। विवाद के चलते यह ऐतिहासिक संकल्प अधूरा रह गया।

परिवार और संत समाज की चिंता

शंकराचार्य के भतीजे जयराम पांडेय ने कहा कि मौके पर कोई ऐसी घटना नहीं हुई थी, प्रशासन का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण और साजिशपूर्ण है। स्नान न कर पाना आस्था पर आघात है। लगातार अनशन/धरने से स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। संत समाज (नासिक के महंत रामस्नेही दास, महंत बैजनाथ) ने शांति और संवाद से समाधान की अपील की। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी शांति बनाए रखने की अपील की।

प्रशासन की तरफ से

मेला प्रशासन ने कहा कि शंकराचार्य ने बिना अनुमति पालकी से बैरियर तोड़ा और भीड़ के साथ संगम रोड पर जाने की कोशिश की, जिससे व्यवस्था बिगड़ी और सुरक्षा खतरे में पड़ी। CM योगी आदित्यनाथ ने भी “सनातन धर्म को कमजोर करने वाली साजिश” के खिलाफ सतर्क रहने की बात कही।

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