📍 समाचार सार:
भदावर पीजी कॉलेज, बाह में संस्थापक प्राचार्य बी.एल. तिवारी की शताब्दी जयंती समारोह प्रेरणा और स्मृतियों का मंच बना। शिक्षा, साहित्य और समाजसेवा में उनके योगदान को याद करते हुए ‘अक्षर पुरुष’ पुस्तक का विमोचन किया गया। हवन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, पुरस्कार वितरण और सम्मान समारोह के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। डॉ. केएस राना, न्यायमूर्ति विनोद मिश्रा, डॉ. गीता यादव समेत अनेक शिक्षाविदों व विशिष्टजनों ने बी.एल. तिवारी के व्यक्तित्व को युगद्रष्टा और शिक्षा-क्रांतिकारी बताया। समारोह में भदावर कॉलेज के पूर्व शिक्षक, कर्मचारी, छात्र व क्षेत्रीय गणमान्यजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
‘जिसने चंबल के बीहड़ों में शिक्षा की मशाल जलाई, वो सिर्फ शिक्षक नहीं, युगद्रष्टा था’ – जयंती समारोह में हुआ पुस्तक विमोचन व प्रेरणास्पद व्यक्तित्वों का सम्मान
रिपोर्ट- मुकेश शर्मा
बाह/आगरा। शिक्षा, साहित्य और जन-जागरण के पुरोधा अक्षर पुरुष बी.एल. तिवारी की शताब्दी जयंती पर भदावर पीजी कॉलेज का प्रांगण मंगलवार को एक ऐतिहासिक एवं प्रेरणास्पद समारोह का साक्षी बना। संस्थापक प्राचार्य बी.एल. तिवारी की शिक्षा साधना, उनके संघर्ष और क्रांतिकारी विचारों को समर्पित इस आयोजन में वक्ताओं ने उन्हें चंबल के बीहड़ों में ज्ञान के दीप जलाने वाला युगपुरुष बताया।
कार्यक्रम की शुरुआत हवन यज्ञ व प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। इसके उपरांत बच्चों द्वारा प्रस्तुत की गई सांस्कृतिक झांकियों ने वातावरण को भावविभोर कर दिया। समारोह का केंद्रीय आकर्षण रहा ‘अक्षर पुरुष’ नामक पुस्तक का विमोचन, जिसमें बी.एल. तिवारी के जीवन के अनछुए पहलुओं को समेटा गया है।

मुख्यवक्ता और रुहेलखंड एवं कुमायूं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. के.एस. राना ने कहा कि –
📍 “बी.एल. तिवारी ने शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए ब्रिटिश शासन से भी लोहा लिया। उनके समय में अंग्रेजों के नाम पर स्थापित छात्रावासों के नाम बदलकर उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई, महाराणा प्रताप और यशोदा जैसे प्रेरणादायक महापुरुषों के नाम पर रखे – यह शिक्षा के भारतीयकरण की क्रांतिकारी सोच थी।”
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश विनोद मिश्रा ने भावुक होते हुए साझा किया कि –
📍 “बी.एल. तिवारी जैसे शिक्षक सिर्फ किताबें नहीं पढ़ाते थे, वे जीवन बनाते थे। जो विद्यार्थी बेसहारा था, उसके लिए तिवारी जी छांव बनकर खड़े रहते थे।”
विद्यालय प्रबंधक डॉ. गीता यादव ने उनकी शैक्षणिक परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की और हर वर्ष उनकी जयंती और पुण्यतिथि को व्यापक स्तर पर मनाने का संकल्प लिया।
शिक्षाविद डॉ. मदन गोपाल सिंह भदौरिया ने कहा –
📍 “बी.एल. तिवारी का जीवन उस दीये की तरह है, जो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है। उनका 7 भाषाओं पर अधिकार और हर वर्ग के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण उन्हें अपवाद बनाता है।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. महेन्द्र कुमार ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी शंकर देव तिवारी ने निभाई, जो बी.एल. तिवारी के पुत्र हैं।
सम्मानित हस्तियां:
- डॉ. के.एस. राना
- वी.के. मिश्रा
- गजेन्द्र सिंह भदौरिया
- अजय भदौरिया
- डॉ. गीता यादव
- डॉ. महेन्द्र कुमार
- डॉ. शिवशंकर कटारे
- अशोक तिवारी
- नरेश सक्सेना
- श्यामसुंदर पाराशर
- भदावर कॉलेज के सेवानिवृत्त शिक्षक व कर्मचारी
- शताब्दी समारोह की निबंध व चित्रकला प्रतियोगिता के विजेता छात्र-छात्राएं
- सांस्कृतिक प्रस्तुति देने वाली छात्राएं
कार्यक्रम में विशिष्ट उपस्थिति:
रामसेवक शर्मा, राजबहादुर शर्मा, सतीश पचौरी, आशुतोष नेहरू, शरद शर्मा, हृदय नारायण शर्मा, कृपा नारायण शर्मा, मानवेन्द्र सिंह राठौड़, मुकेश शर्मा, श्याम शर्मा, विनोद सिंह प्रधान, वी.के. शर्मा, अभिलाश शर्मा, डॉ. अनिल गौतम, मुन्नालाल पचौरी, श्याम विधौलिया, सुरेश पचौरी, ब्रह्मदत्त शर्मा, अहिवरन सिंह परिहार, विजतेन्द्र गुप्ता, मुरलीधर शर्मा, नरेन्द्र ताना जी, शिवशंकर बोहरे, विशाल चतुर्वेदी, लक्ष्मी नारायण गुप्ता, अजय कसेरे, रामशंकर गुप्ता, विनोद सांवरिया आदि।
📍बी.एल. तिवारी की शताब्दी जयंती पर आयोजित यह समारोह न केवल श्रद्धांजलि था, बल्कि वर्तमान और आगामी पीढ़ियों के लिए यह संदेश भी था कि शिक्षा ही समाज की असली क्रांति है। ‘अक्षर पुरुष’ की साधना आज भी भदावर के आंगन में जीवित है – प्रेरणादायक, अडिग और अमर।
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