आगरा: 23 दिसंबर 2025 को चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती पर आगरा में पुरानी साजिश फिर सुर्खियों में आ गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता कुंवर शैलराज सिंह ने अपनी फेसबुक पोस्ट में 2002 का चौंकाने वाला दावा किया है कि जब दीवानी चौराहे पर चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा स्थापित की जा रही थी, तब समाज के कुछ “तथाकथित ठेकेदारों” ने सब्बल से उसे खंडित करने की पुरजोर कोशिश की थी।

शैलराज सिंह के अनुसार प्रतिमा को जयपुर से जीरो तापमान में खुली मेटाडोर में लाया गया था। जगत सिंह फौजदार द्वारा चेन पुली से प्लेटफॉर्म पर स्थापित करने के दौरान ही इन लोगों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी। उनकी कोशिश तब नाकाम हुई जब चौधरी अजित सिंह के हस्तक्षेप के बाद प्रतिमा बच सकी।

शैलराज सिंह ने लिखा कि इन्हीं तत्वों ने प्रतिमा स्थापना से लेकर 2003 में उनके 11 दिन के आमरण अनशन तक हर कदम पर बाधा डाली, अफवाहें फैलाईं और समाज को गुमराह किया। उन्होंने 2003 के अनशन का भी जिक्र किया जिसमें राजनाथ सिंह (तब भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री) भी पहुंचे थे और उन्होंने छतरी निर्माण की घोषणा की थी।

हालांकि पोस्ट में किसी का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया गया, लेकिन शैलराज सिंह ने चेतावनी दी है कि मुखौटा लगाकर चरण सिंह का अनुयायी बनने वाले लोग वास्तव में विरोधी मानसिकता रखते हैं। उन्होंने समाज से अपील की है कि इन “मुखौटाधारियों” की असलियत पहचानी जाए।

यह खुलासा जयंती के मौके पर आगरा की राजनीति और जाट-किसान समुदाय में पुराने टकराव को फिर से जिंदा कर रहा है। कई लोग अब इस सवाल पर बहस कर रहे हैं कि आखिर वो “तथाकथित ठेकेदार” कौन थे?

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