सबलगढ़/मुरैना: नगर पालिका परिषद सबलगढ़ की साधारण सभा की बैठक आज दोपहर 12 बजे नगर पालिका कार्यालय के सभागार में बुलाई गई थी, लेकिन दस्तावेजों को लेकर पार्षदों के भारी विरोध और हंगामे के बीच बैठक रद्द हो गई। अध्यक्ष सोनेराम धाकड़ ने कोरम के अभाव का हवाला देकर बैठक समाप्त घोषित की और सभागार से चले गए। इसके बाद उपाध्यक्ष ललिता मनोज प्रताप सिंह जादौन ने बैठक जारी रखने की कोशिश की, लेकिन कर्मचारी और प्रोसिडिंग रजिस्टर न मिलने से बैठक दोबारा शुरू नहीं हो सकी।
बैठक में क्या हुआ?
28 जनवरी को जारी नोटिस के अनुसार बुलाई गई इस बैठक में अध्यक्ष सोनेराम धाकड़, उपाध्यक्ष श्रीमती ललिता मनोज प्रताप सिंह जादौन सहित करीब 15 पार्षद दोपहर 12:30 बजे तक उपस्थित हुए। तय एजेंडा पर चर्चा शुरू होने से पहले सभी पार्षदों ने वर्ष 2023 से अब तक नगर पालिका द्वारा किए गए भुगतानों का विवरण, पीआईसी (परियोजना कार्यान्वयन समिति) द्वारा पारित प्रस्तावों का रजिस्टर और परिषद की बैठक का प्रोसिडिंग रजिस्टर मांगा।
पार्षदों का आरोप है कि कई बार मांग करने के बावजूद मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सुरेश गोयल ने ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। सीएमओ ने 7 दिनों में दस्तावेज देने का वादा किया, लेकिन आज भी नहीं दिए।
इस पर पार्षदों ने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने सीएमओ सुरेश गोयल के खिलाफ नारेबाजी की और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाए। करीब एक घंटे तक चले विवाद के बाद अध्यक्ष सोनेराम धाकड़ ने कहा कि कोई पार्षद उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर नहीं कर रहा और कोरम पूरा नहीं है, इसलिए बैठक रद्द है। वे उठकर चले गए, और कर्मचारी भी प्रोसिडिंग रजिस्टर लेकर बाहर निकल गए।
उपाध्यक्ष की कोशिश नाकाम
अध्यक्ष के जाने के बाद उपाध्यक्ष ललिता मनोज प्रताप सिंह जादौन ने बैठक जारी रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में बैठक चल सकती है। करीब एक घंटे तक कर्मचारियों और रजिस्टर को बुलाने की मांग चली, लेकिन कोई कर्मचारी नहीं लौटा और बैठक बेनतीजा रही।
पार्षदों vs सीएमओ: पुराना विवाद
यह घटना सबलगढ़ नगर पालिका में लंबे समय से चल रहे तनाव को दर्शाती है। पार्षदों का आरोप है कि पारदर्शिता की कमी है और विकास कार्यों में अनियमितताएं हो रही हैं। वहीं, सीएमओ सुरेश गोयल पहले भी विवादों में रहे हैं – हाल ही में उन्हें लापरवाही के आरोपों पर निलंबित किया गया था, हालांकि बाद में कुछ मामलों में राहत मिली।
पिछले महीनों में अध्यक्ष सोनेराम धाकड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी पेश हो चुका है, जिसमें 17 पार्षद एकजुट हुए थे। भ्रष्टाचार के आरोपों (जैसे फिनाइल और स्ट्रीटलाइट घोटाला) ने भी राजनीतिक घमासान बढ़ाया है।
शहर पर असर
लगातार अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पार्षदों के बीच खींचतान से शहर का विकास कार्य ठप पड़ा हुआ है। सड़कें, सफाई, जल निकासी जैसे बुनियादी काम लटके हैं, जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है। शहर की दशा बिगड़ती जा रही है और विकास अंधकार की ओर बढ़ता दिख रहा है।
- रिपोर्ट – जिला ब्यूरो चीफ मुरैना मुहम्मद इसरार खान

