फिरोजाबाद। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर उत्तर प्रदेश में शिक्षकों का असंतोष अब खुला टकराव बन चुका है। उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ ने सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में संघ ने RTE (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट देने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार तत्काल अध्यादेश नहीं लाती, तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से व्यापक किया जाएगा।
संघ का मुख्य तर्क है कि RTE लागू होने के समय स्पष्ट था कि TET केवल नई नियुक्तियों पर लागू होगा। पूर्व नियुक्त शिक्षकों को विधिक छूट मिली थी। अब सुप्रीम कोर्ट की हालिया व्याख्या के बाद इसे पूर्वव्यापी (retrospective) तरीके से लागू करना नियमों का दुरुपयोग है, जो संवैधानिक सिद्धांतों (जैसे सेवा शर्तों में हस्तक्षेप न करना) के विपरीत है। इससे शिक्षक अपनी ही सेवा में असुरक्षित हो गए हैं, जो प्रशासनिक न्याय की भावना को चोट पहुंचाता है।
प्रभावित शिक्षकों की संख्या:
- उत्तर प्रदेश में करीब 2 लाख शिक्षक (प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल स्तर पर) इस दायरे में आते हैं।
- देशभर में 20 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित।
ये शिक्षक 25-30 साल से सेवा दे रहे हैं, लेकिन अब TET पास न करने पर नौकरी/प्रमोशन पर खतरा मंडरा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 के फैसले में कहा था कि 5 साल से ज्यादा सेवा बाकी वाले शिक्षकों को TET पास करना अनिवार्य है (2 साल की समयसीमा के साथ), जबकि 5 साल या कम बाकी वालों को छूट मिली है लेकिन प्रमोशन नहीं। केंद्र सरकार ने भी संसद में सामूहिक छूट देने से इनकार कर दिया है।
ज्ञापन सौंपने का विवरण:
ज्ञापन फिरोजाबाद जिला मुख्यालय में जिला अध्यक्ष रीमा सिंह यादव के नेतृत्व में सौंपा गया। इसमें महामंत्री वंदना तोमर, नीति यादव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रेनू, कोषाध्यक्ष शिखा मीडिया, प्रभारी नीलम, संयुक्त मंत्री गीतांजलि, अर्चना, पारुल, शबीना, उपाध्यक्ष प्रिया सहित ब्लॉक अध्यक्षों (टूण्डला पूनम, शिकोहाबाद अपर्णा श्रीवास्तव, नारखी नीतू, अराव रुक्मणि, जसराना सहित सुनीता, मिथलेश, अमिता, विनीता, रंजना, पूनम, मंजू, अनुराधा, तुलसा, ऋचा, सीमा, रश्मि, ऋतू, साधना, अवनीश, जया, करुणा, सोनम, प्रगति, शिल्पी, सुमन, ममता आदि) और सैकड़ों महिला सदस्य उपस्थित रहीं।
संघ की मांगें:
- तत्काल अध्यादेश लाकर RTE से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से स्थायी छूट।
- सेवा शर्तों में कोई हस्तक्षेप न हो।
- यदि मांग नहीं मानी गई तो चरणबद्ध आंदोलन (धरना, प्रदर्शन, महारैली आदि)।
पृष्ठभूमि और अन्य प्रतिक्रियाएं:
यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के 2025 फैसले से शुरू हुआ, जिसने TET को न्यूनतम योग्यता बताया। UP में शिक्षक संगठन (जैसे टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, जूनियर हाईस्कूल संघ आदि) भी प्रदर्शन, काली पट्टी बांधकर विरोध, सोशल मीडिया कैंपेन (#JusticeforTeachers) चला रहे हैं। कई जिलों (सुल्तानपुर, हाथरस, लखीमपुर खीरी आदि) में धरने-प्रदर्शन हो चुके हैं। केंद्र ने छूट देने से इनकार किया है, लेकिन शिक्षक संगठन RTE में संशोधन या अध्यादेश की मांग पर अड़े हैं।

