लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तंज और व्यंग्य की बौछार हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जापान दौरे पर समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखा कटाक्ष किया है। कानपुर में पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश ने कहा, “हमारे मुख्यमंत्री नाम बदलने में एक्सपर्ट हैं। मुझे तो डर है कि कहीं जापान वाले इस बात से घबरा न जाएं कि योगी जी वहां जाकर जापान का नाम भी बदलकर ‘आदित्यपुर’ या ‘आदित्यपुरम’ न कर दें।” यह बयान योगी सरकार की उस नीति पर निशाना है, जिसमें इलाहाबाद को प्रयागराज, फैजाबाद को अयोध्या, मुगलसराय स्टेशन को पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर और अन्य कई जगहों के नाम बदले गए। अखिलेश अक्सर आरोप लगाते हैं कि भाजपा विकास के बजाय प्रतीकों और नामों की राजनीति कर रही है।
दरअसल, जापान को ‘निप्पॉन’ (उगते सूरज की भूमि) भी कहा जाता है, और योगी का नाम ‘आदित्यनाथ’ सूर्य देव से जुड़ा है। अखिलेश ने इसी का मजाक उड़ाते हुए कहा कि कहीं योगी जी ‘निप्पॉन’ को ‘आदित्यपुरम’ न बना दें। योगी फिलहाल जापान में हैं, जहां उन्होंने 501 किमी/घंटा की रफ्तार वाली मैग्लेव ट्रेन का सफर किया और 11 हजार करोड़ रुपये के निवेश MoU साइन किए। लेकिन अखिलेश का यह व्यंग्य अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
सोशल मीडिया पर मीम्स और चर्चा:
अखिलेश के बयान ने X (पूर्व ट्विटर) पर तहलका मचा दिया है। यूजर्स मीम्स शेयर कर रहे हैं, जहां योगी को जापान का नाम बदलते दिखाया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, @AdvAbhishekSinh ने पोस्ट किया: “भैया @yadavakhilesh बता रहे थे कि योगी आदित्यनाथ जी जापान गए हैं और उनको नाम बदलने की आदत है, कहीं जापान का नाम ना बदल दें।” इसी तरह, @Report1Bharat ने वीडियो शेयर कर अखिलेश के बयान को हाइलाइट किया। सपा समर्थक इसे मजेदार व्यंग्य बता रहे हैं, जबकि भाजपा कार्यकर्ता इसे ‘तुच्छ राजनीति’ करार दे रहे हैं। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर भी मीम्स वायरल हैं, जहां ‘आदित्यपुरम’ को नए मीम टेम्प्लेट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
पृष्ठभूमि और सियासी असर:
यह पहली बार नहीं है जब अखिलेश ने योगी पर नाम बदलने को लेकर तंज कसा है। 2018 से योगी सरकार ने कई मुगल-कालीन नामों को बदलकर हिंदू धार्मिक या राष्ट्रवादी नाम दिए हैं। अखिलेश इसे ‘विकास से ध्यान भटकाने’ की रणनीति बताते हैं। वहीं, भाजपा का कहना है कि ये बदलाव सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं। यह बयान लोकसभा चुनाव से पहले आया है, इसलिए सपा-भाजपा में जुबानी जंग और तेज हो सकती है।

