लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जापान दौरा विकास और निवेश के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है, लेकिन राजनीतिक मोर्चे पर यह सियासी तीर बन गया है। योगी ने यामानाशी प्रीफेक्चर में SCMAGLEV ट्रेन का टेस्ट राइड लिया, जहां ट्रेन ने 500+ किमी/घंटा की रफ्तार से 100 किमी का सफर सिर्फ 10 मिनट में पूरा किया। योगी ने वीडियो शेयर कर लिखा कि यह “भविष्य के सटीक परिवहन का प्रतीक” है और जापान की तकनीक की जमकर तारीफ की। इस दौरे में अब तक 11 हजार करोड़ रुपये के निवेश MoU साइन हो चुके हैं, जो यूपी को औद्योगिक हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे राजनीतिक निशाने पर लिया। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट में अखिलेश ने लिखा: “माना इंडिया में बुलेट ट्रेन आने की स्पीड कछुए की चाल जैसी है, लेकिन दिल्ली-लखनऊ की आपसी खींचातानी का मतलब ये नहीं कि कोई विदेश की धरती पर जाकर, इस बात पर उंगली उठाए। भाजपाई आपस के झगड़े को विश्व मंच पर न ले जाएं।” यह तंज केंद्र (दिल्ली) और राज्य (लखनऊ) सरकार के बीच कथित मतभेदों पर है, खासकर बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की धीमी प्रगति पर। भारत में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट (जापान की मदद से) सालों से चल रहा है, लेकिन लागत बढ़ने और देरी से विवादास्पद बना हुआ है।

अखिलेश का यह बयान योगी के दौरे को ‘मनसुख-पर्यटन’ या नाम बदलने की पुरानी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पहले अखिलेश ने योगी पर तंज कसा था कि कहीं जापान का नाम ‘आदित्यपुरम’ न कर दें। अब ‘कछुए की चाल’ वाला व्यंग्य भारत में हाई-स्पीड रेल की धीमी प्रगति पर केंद्रित है, जबकि योगी जापान की तकनीक से प्रेरित होकर यूपी में लागू करने की बात कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया:

अखिलेश के पोस्ट ने X पर तहलका मचा दिया। सपा समर्थक इसे ‘सच्चाई’ बता रहे हैं, जबकि भाजपा नेता इसे ‘नकारात्मक राजनीति’ करार दे रहे हैं। मीम्स में योगी की मैग्लेव स्पीड vs भारत की ‘कछुआ स्पीड’ वाले जोक्स वायरल हैं। योगी के वीडियो में ट्रेन की स्पीड 50 से 500+ तक बढ़ते नंबर देखकर यूजर्स कह रहे हैं – “योगी जी ने दिखा दिया असली स्पीड!”

योगी का यह दौरा 23-26 फरवरी तक सिंगापुर और जापान में रहा, मुख्य फोकस निवेश, लॉजिस्टिक्स और हाई-स्पीड रेल तकनीक पर। मैग्लेव ट्रेन चुंबकीय लेविटेशन से हवा में तैरकर चलती है, जो दुनिया की सबसे तेज ट्रेन है। योगी इसे यूपी के लिए मॉडल बताते हैं। वहीं, अखिलेश अक्सर केंद्र-राज्य खींचतान और विकास की धीमी गति पर हमला बोलते हैं।

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