फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय, दबरई में आयुष्मान भारत योजना के तहत आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम की आयुष्मान आईडी बनाने का लक्ष्य पूरा करने के लिए करीब 40 से 45 संविदा कर्मचारियों को बंधक बनाकर देर रात तक जबरन काम कराने का आरोप लगा है। आरोप है कि ऑफिस के मुख्य गेट पर ताला लटका दिया गया और कर्मचारियों की मिन्नतों के बावजूद उन्हें घर नहीं जाने दिया गया।

घटना गुरुवार (29 जनवरी 2026) की शाम से शुरू हुई, जब डाटा ऑपरेटर, ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर (बीपीएम) और ब्लॉक कम्युनिटी प्रोग्राम मैनेजर (बीसीपीएम) सहित संविदा कर्मचारियों को लक्ष्य पूरा करने का दबाव बनाया गया। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “अधिकारियों ने कहा कि अभी आईडी बनाओ, लक्ष्य पूरा होना है। लेकिन आईडी जनरेट करने के लिए ओटीपी आशा और एएनएम के मोबाइल पर आता है। रात के 11-12 बजे कोई फोन नहीं उठा रही थी। बिना ओटीपी के काम तकनीकी रूप से असंभव था, फिर भी हमें कमरों में बंद कर दिया गया।”

कर्मचारियों ने अधिकारियों से गुहार लगाई कि उन्हें घर जाने दिया जाए और वे अगले दिन काम पूरा कर देंगे, लेकिन उनकी कोई नहीं सुनी। गेट पर ताला लगने से कर्मचारी खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहे थे। कई कर्मचारी भावुक होकर रो पड़े। काम का भारी दबाव, परिवार से दूर रहना और घर न जाने की मजबूरी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।

यह घटना आयुष्मान भारत योजना के लक्ष्यों को लेकर विभागीय दबाव को दर्शाती है। योजना के तहत गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड जारी किए जाते हैं, और इसमें आशा-एएनएम की भूमिका महत्वपूर्ण है। लेकिन लक्ष्य पूरा करने के नाम पर कर्मचारियों के साथ ऐसा व्यवहार मानवाधिकारों का उल्लंघन माना जा रहा है।

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