फिरोजाबाद: साइबर क्राइम पुलिस और एसओजी टीम ने फर्जी लोन एप के जरिए देशभर में 800 से अधिक लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह का सरगना महेश, निवासी गुरुग्राम (हरियाणा), फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश पुलिस द्वारा की जा रही है।

यह गिरोह फर्जी लोन एप के माध्यम से लोगों का मोबाइल डाटा चोरी, ब्लैकमेलिंग और अवैध सिम कार्डों की सप्लाई जैसे संगठित साइबर अपराधों को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।

गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी

एसपी सिटी रविशंकर प्रसाद एवं सीओ साइबर चंचल त्यागी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में—

  • राघव निवासी जहारवीर नगर, सिरसागंज (फिरोजाबाद)

  • रजनीश निवासी कौरारा रोड बाईपास, सिरसागंज

  • सोनू निवासी जहारवीर नगर, सिरसागंज

  • नीलेश निवासी कुतुबपुर, नसीरपुर

  • पुष्पेंद्र निवासी नगला कन्ही, खैरगढ़

शामिल हैं।
आरोपियों के पास से 2 लैपटॉप, 6 मोबाइल फोन, 18 सिम कार्ड और एक थंब इम्प्रेशन रीडिंग मशीन बरामद की गई है।

इस तरह करते थे ठगी

इंस्पेक्टर साइबर राजेश कुमार सिंह और एसओजी प्रभारी प्रेमशंकर पांडेय ने बताया कि जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने ‘महान किट प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से एक फर्जी फर्म बनाई थी। इसी के माध्यम से उन्होंने प्ले स्टोर और एप्पल स्टोर पर कई फर्जी लोन एप अपलोड किए।

जैसे ही कोई व्यक्ति एप डाउनलोड करता, वह एप परमिशन के बहाने उसके मोबाइल का पूरा डाटा (कॉन्टैक्ट्स और गैलरी) एक्सेस कर लेता था। पीड़ित के यूपीआई अकाउंट में कुछ रुपये भेजकर उसे लोन बताया जाता और फिर अत्यधिक ब्याज दर पर वसूली शुरू की जाती थी।

भुगतान न करने पर आरोपियों द्वारा पीड़ित की तस्वीरों को मॉर्फ कर आपत्तिजनक बनाया जाता और उन्हें रिश्तेदारों व परिचितों को भेजने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया जाता था। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह अब तक करीब 800 लोगों को ठगी का शिकार बना चुका है।

अवैध सिम कार्डों का नेटवर्क

गिरोह के सदस्य मजदूरों और अशिक्षित लोगों को पैसों का लालच देकर उनके आधार कार्ड हासिल करते थे और अंगूठा लगवाकर उनके नाम पर सिम कार्ड एक्टिवेट कराते थे। इन सिम कार्डों को वास्तविक धारकों को न देकर साइबर अपराधियों और रिकवरी एजेंटों को ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था, ताकि अपराध के समय पहचान छिपी रहे।

पुलिस ने भारत सरकार के ‘प्रतिबिंब’ पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करते हुए इस गिरोह को दबोचा है।

महेश ने रजनीश के जरिए खड़ा किया नेटवर्क

जांच में सामने आया कि रजनीश गुरुग्राम में नौकरी के दौरान महेश के संपर्क में आया था। इसके बाद उसी के जरिए अन्य युवाओं को गिरोह से जोड़ा गया। सभी को ठगी की रकम में बराबरी का हिस्सा दिया जाता था। बीएससी तक पढ़े राघव और रजनीश का मुख्य काम अवैध सिम कार्ड जुटाना था।

पुलिस की अपील

एसएसपी सौरभ दीक्षित ने आमजन से अपील की है कि

  • किसी भी अनजान लोन एप को डाउनलोड न करें,

  • अपनी निजी जानकारी और मोबाइल परमिशन साझा करने से बचें,

  • किसी भी संदिग्ध गतिविधि या फर्जी लोन एप की तुरंत पुलिस में शिकायत करें

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