आगरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में चल रहे हिंदू सम्मेलनों की कड़ी में आगरा के जीआईसी मैदान में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में प्रसिद्ध कथावाचक और भागवत आचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने बेहद आक्रामक और बेबाक भाषण दिया। उन्होंने मथुरा-काशी, कृष्ण जन्मभूमि, ताजमहल, जामा मस्जिद और हिंदुओं की जनसंख्या जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाकर सियासी-धार्मिक माहौल को गरमा दिया।
मथुरा-काशी पर खुली चुनौती
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा, “लोग कहेंगे मैं हिंदू-मुस्लिम कर रहा हूं, लेकिन मैं सौगंध खाता हूं – मथुरा और काशी हमें दे दो, हम तुम्हें दही और बूरा खिलाएंगे। ब्रज में दही-बूरे के बिना दावत अधूरी है।” उन्होंने “दो कदम हम, दो कदम तुम” चलने की बात की, लेकिन साथ ही जोर देकर कहा, “अब बहुत सह लिया, अब नहीं सहेंगे। हिंदू अपना हक लेकर रहेंगे।”
शंकराचार्य प्रकरण पर ‘धर्मसंकट’, प्रशासन पर तंज
प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ी घटना पर उन्होंने कहा कि यह उनके लिए धर्मसंकट का विषय है। एक तरफ शंकराचार्य जैसे संत, दूसरी तरफ स्नानार्थियों की चिंता। फिर भी स्पष्ट किया, “संतों के साथ मारपीट ठीक नहीं। ऐसी स्थिति को बढ़ाना नहीं चाहिए, मिल-बैठकर सुलझाना चाहिए।” प्रशासन को संदेश देते हुए बोले, “जिसके माथे पर तिलक, सिर पर शिखा और शरीर पर भगवा हो, उसके साथ आदर से पेश आना चाहिए। मारपीट से समस्याएं हल नहीं होतीं।”
ताजमहल पर सीधा वार
आगरा की पहचान पर सवाल उठाते हुए कहा, “आगरा की पहचान ताजमहल से क्यों? क्या यहां यमुना नहीं, मंदिर नहीं? क्या हम किसी की कब्र देखने के लिए इतने फ्री हैं? जिसे शौक हो, वह जाए, आई डोंट केयर।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ताजमहल से पहले कृष्ण जन्मभूमि देखना चाहते हैं और वहां ठाकुरजी का भव्य मंदिर बनवाना चाहते हैं।
जनसंख्या का मुद्दा और कश्मीर संदर्भ
हिंदुओं से जनसंख्या बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि अगर कश्मीर में हिंदुओं की संख्या ज्यादा होती, तो हालात अलग होते। पहलगाम आतंकी हमले में शहीद शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या द्विवेदी का जिक्र करते हुए बोले कि संख्या का संतुलन सुरक्षा से जुड़ा है।
जामा मस्जिद-केशवदेव दावा
भाषण के सबसे तीखे हिस्से में दावा किया कि आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में केशवदेव की मूर्ति दबाई गई है। सवाल किया, “क्या हिंदू यह अपमान सहते रहें या ठाकुरजी को सम्मानपूर्वक निकालकर मथुरा में सही स्थान पर स्थापित कर अयोध्या की तरह भव्य-दिव्य मंदिर बनवाएं?”
यह भाषण सम्मेलन में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं को भावुक और उत्साहित कर गया। देवकीनंदन ठाकुर ने गो-पूजन भी किया और हिंदू एकता पर जोर दिया। सम्मेलन सनातन रक्षा समिति द्वारा आयोजित था।

