आगरा। कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए भयानक आतंकी हमले का जख्म आज भी ताजा है, जिसमें 26 लोग शहीद हुए थे। इस हमले में कानपुर के शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या द्विवेदी ने आगरा के जीआईसी मैदान में आयोजित हिंदू सम्मेलन में मंच से अपनी पीड़ा और व्यथा साझा की। भावुक होते हुए उन्होंने सनातन धर्म, हिंदुत्व और हिंदुओं की एकजुटता पर कड़ा संदेश दिया कि अगर अब जागरूकता नहीं आई, तो भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

ऐशान्या ने कहा, “22 अप्रैल 2025—हमारे लिए ब्लैक डे”। उन्होंने बताया कि उस दिन आतंकियों ने पहले धर्म पूछा – “कलमा पढ़ो, नहीं तो गोली मार देंगे”। मेरे पति शुभम ने गर्व से कहा, “मैं हिंदू हूं”। फिर भी उन पर गोलियां चलीं। ऐशान्या ने एक घटना साझा करते हुए बताया कि हमले के बाद जब वे अपनी बहन के स्टोर पर गईं, तो बुर्के में आई तीन महिलाएं उन्हें देखकर लौट गईं और बोलीं, “यह वही पहलगाम वाली लड़की है, इसके यहां से कुछ नहीं खरीदना है।” भावुक होकर उन्होंने कहा, “मैंने उनका क्या बिगाड़ा था? मेरे धर्म की वजह से गोलियां चलीं, मैंने उनके साथ कुछ गलत नहीं किया, फिर भी अपमान सहना पड़ा।”

“हम हिंदू हैं—हम एक हैं, कब खून खौलेगा?”

मंच से तीखे शब्दों में ऐशान्या ने कहा, “आपके जेहन में कब यह बात बैठेगी कि हम हिंदू हैं, हम एक हैं? हम वहां नहीं जाएंगे जहां हिंदुओं को छोटा समझा जाता है। अगर वे ऐसा कर सकते हैं, तो हम भी अपने आत्मसम्मान को जगाएं, वरना बहुत जल्द हम खत्म हो जाएंगे। यह होने नहीं देना है।”

उन्होंने कश्मीर की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर वहां हिंदू बहुमत होता, तो 26 लोगों की हत्या नहीं होती, मेरे पति को गोली नहीं लगती। समय रहते एकजुटता नहीं दिखाई गई, तो हालात बिगड़ने में देर नहीं लगेगी।

“अब और किसी बेटी–बहू के साथ ऐसा न हो”

ऐशान्या ने अपील की, “मैं नहीं चाहती कि किसी और बेटी या बहू के साथ ऐसा हो। एक रहिए। हिंदुस्तान हिंदुओं का स्थान था, है और रहेगा।” उनके शब्दों ने पूरे पंडाल को भावुक कर दिया और सम्मेलन में मौजूद लोगों ने जोरदार नारे लगाए।

यह स्पीच हिंदू सम्मेलन में एकजुटता और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत करने वाली साबित हुई। ऐशान्या द्विवेदी पहले भी कई मंचों पर पहलगाम हमले के दर्द को साझा कर चुकी हैं और शहीद शुभम को शहीद का दर्जा देने की मांग कर रही हैं।

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