आगरा। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के अग्रणी नायक, हिंदू हृदय सम्राट, पद्म विभूषित, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं हिमाचल व राजस्थान के पूर्व राज्यपाल परम श्रद्धेय ‘बाबूजी’ कल्याण सिंह की जयंती के अवसर पर मण्डल श्यामों के कलाल खेड़िया में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर उपस्थित जनों ने बाबूजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके संघर्ष, त्याग और राष्ट्रसेवा को नमन किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय सचिव लोधी महासभा प्रकाश राजपूत, डॉ. लाल सिंह राजपूत , मण्डल अध्यक्ष विजय सिंह लोधी, लोधी युवा महासभा के जिला अध्यक्ष उमेन्द्र राजपूत, हबलदार सिंह एम डी टी एस रिसोर्ट, धीरेन्द्र धाकरे, युवराज लोधी, रामू राजपूत, संतोष राजपूत, संजय सिंह, हरिकिशन राजपूत, भूपाल सिंह, हरिओम राजपूत, राजेश राजपूत, करन, डॉ श्रीकांत राजपूत, डॉ प्रेमपाल लोधी सहित बड़ी संख्या में समाजसेवी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने कहा कि बाबूजी कल्याण सिंह के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी जन-जन तक पहुँची। श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए उनका अडिग संकल्प, त्याग और समर्पण देश के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। गरीबों, किसानों एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित बाबूजी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है।
इस अवसर पर उपस्थित जनों ने भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि बाबूजी कल्याण सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए, ताकि उनके ऐतिहासिक योगदान को राष्ट्र स्तर पर उचित सम्मान मिल सके।
भाजपा के ‘प्रेरणा स्थल’ में बाबूजी की उपेक्षा पर उठे सवाल
कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह भी कहा कि भाजपा द्वारा बनाए गए प्रेरणा स्थल में बाबूजी कल्याण सिंह जैसे महान नेता को स्थान न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक है। जिनके संघर्ष से पार्टी मजबूत हुई, जिनके साहसिक निर्णयों से श्रीराम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ—उनकी उपेक्षा पर पुनर्विचार आवश्यक है।
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि बाबूजी केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे, और उनकी स्मृति व योगदान को हर उस स्थान पर सम्मान मिलना चाहिए जहाँ राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक चेतना की बात होती है।बाबूजी कल्याण सिंह अमर हैं, उनकी विचारधारा अमर है।उनका जीवन देश, समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणापुंज बना रहेगा।

